Madhya Pradesh: भारत का दिल | इतिहास, संस्कृति और छुपे रहस्य | Amazing Facts About MP

एक ऐसा राज्य जिसे भारत का दिल कहा जाता है।

एक ऐसा राज्य जहाँ एक नदी उल्टी बहती है।

ये राज्य अनेक ऐतिहासिक किलों और स्मारकों की धरोहर है, और इस राज्य मे भारत के सबसे ज्यादा नैशनल पार्क्स हैं। इन पार्क्स मे पाए जाने वाले tigers से प्रभावित होकर Rudyard Kipling ने प्रसिद्ध किताब “the jungle book” लिखी।

मध्य प्रदेश का परिचय

ये एक समय पर भारत का सबसे बड़ा राज्य था। लेकिन वर्ष 2000 मे छतीसगढ़ को इस राज्य से अलग कर दिया गया था और ये भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। दर्शकों अब तक तो आपको अंदाजा हो गया होगा की हम किस राज्य की बात कर रहे हैं। अगर आप ऐतिहासिक धरोहर, अद्वितीय नदियों, और हरे-भरे जंगल पसंद करते हैं, तो भारत माता चैनल आपका स्वागत करता है मध्य प्रदेश मे।

मध्य प्रदेश का भौगोलिक स्वरूप

इस राज्य के उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात और उत्तर-पश्चिम में राजस्थान है। वर्ष 1947 में भारतीय स्वतंत्रता के बाद, तत्कालीन मध्य प्रांत और बरार प्रांत और कई रियासतों का भारतीय संघ में विलय हो गया और एक नया राज्य, मध्य प्रदेश बना। वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य 1 नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के बाद अस्तित्व में आया, और इस राज्य की राजधानी नागपूर से भोपाल कर दी गई। और अधिक जानें: भारत दर्शन

ऐतिहासिक महत्व और राजवंश

इस राज्य मे कई शासकों ने राज किया जिनमे मराठा, चौहान, चंदेल और बुन्देल काफ़ी प्रसिद्ध हैं। सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त, महाराज विक्रमादित्य, गौतमीपुत्र सातकर्णी, और राजा भोज जैसे राजाओं की ख्याति आज भी अद्वितीय है। इसके अलावा इस प्रदेश की भूमि पर चंद्र शेखर आज़ाद, रविशंकर शुक्ल, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, रानी अवंती बाई, टंट्या भील (टंट्या मामा), और झलकारी बाई जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों और आल्हा-ऊदल, ईसुरी, कवि पद्माकर, और डॉ० हरिसिंह गौर जैसी महान विभूतियों ने भी जन्म लिया।

धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर

इस राज्य मे हिंदू, जैन, बौद्ध और इसाई धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है, जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य, और विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर विभिन्न प्राचीन मंदिर, बौद्ध और जैन स्थल, किले, स्तूप, गुफाएँ, और अन्य ऐतिहासिक स्थल हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। खजुराहो के खजुराहो मंदिर, सांची के स्तूप, ओरक्षा के राजमहल और मंदिर, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, ग्वालियर के ग्वालियर किले, और भिमबेटका के प्राचीन पेंटिंग्स जैसे स्थल यहाँ के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। इस राज्य में प्रकृति से प्रेम करने वाले लोगों के लिए भी कई सुंदर राष्ट्रीय पार्क और उद्यान हैं, जैसे की कान्हा राष्ट्रीय उद्यान , पेन्च नेशनल पार्क, बांधवगढ़ राष्ट्रीय पार्क, और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान आदि। 

भारत में, मध्‍यप्रदेश का नाम साहित्‍य के क्षेत्र में अग्रणी राज्‍यों की सूची में आता है। मध्‍यप्रदेश की क्षेत्रीय भाषाओं जैसे- अवधि, ब्रज और मैथिली आदि में प्रसिद्ध ग्रंथों की रचनाएं हुई, जिनमें ‘तुलसीदास’ की अवधि भाषा में रचित रचनाएं क्रमश: रामचरितमानस, कवितावली, दोहावली, रामलला, जानकी मंगल और पार्वती मंगल आदि प्रसिद्ध हैं। ब्रज भाषा में ‘सूरदास जी’ ने सूरसागर और साहित्‍य लहरी की रचना की। ‘भारतेंदु हरिश्‍चन्‍द्र’ जिन्हे आधुनिक हिंदी साहित्‍य का पिता कहा जाता है उनका जन्म भी मध्य प्रदेश की धरती पर हुआ। उनकी प्रमुख रचनाएं– भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी एवं हरिश्‍चंद्र चंद्रिका आदि है। इस राज्‍य से संबंधित कुछ प्रमुख साहित्‍यकारों की सूची मे भर्तृहरि, भवभूति, केशवदास, माखनलाल चर्तुवेदी, सुभद्रा कुामरी चौहान, गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’, बालकृष्‍ण शर्मा’नवीन’, हरिशंकर परसाई, शरद जोशी, अटल बिहारी वाजपेयी आदि नाम आते हैं।

मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव

जैसा की हमने आपको बताया था की मध्य प्रदेश को भारत का हृदय कहा जाता है, वहीं इसे नदियों का मायका भी कहते हैं। यह उपोष्णकटिबंधीय जलवायु वाला राज्य है और यहां छोटी बड़ी मिलाकर कुल 207 नदियां बहती हैं। यहां ऐसी कई नदियां हैं, जो देश में पानी पीने, और किसानों के लिए पानी की जरूरतों को पूरा करती है। इस राज्य मे बहने वाली प्रमुख नदियां नर्मदा, गोदावरी, माही, गंगा और ताप्ती हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ नर्मदा, माही और ताप्ती हैं। काली सिंध, चंबल, पार्वती, धसान, केन, सिंध, कूनो, शिप्रा और बेतवा दक्षिण से उत्तर की ओर बहते हुए गंगा बेसिन में गिरने वाली नदियाँ हैं। मध्य प्रदेश से निकलने वाली सोन नदी दक्षिण से गंगा में मिलने वाली सबसे बड़ी सहायक नदी है। पेंच, कन्हान, वैनगंगा, वर्धा और पेनगंगा नदियाँ गोदावरी में गिरती हैं। लेकिन इन सब मे सबसे खास है नर्मदा नदी। क्यूँ की ये है भारत की सबसे पुरानी नदी और इसे मध्य प्रदेश की जीवन रेखा माना जाता है। ये अमर कंटक की पहाड़ियों से निकलती है और सबसे खास बात ये है की ये विपरीत दिशा मे बहती है।

मध्य प्रदेश मे अनेक जनजातियों के अनूठे संगीत, नृत्य, आभूषण का संगम है। यहाँ गोंड, कोल, भील, मुरिया, बैगा, कोरकू, कामरा, मारिया और ओरांव आदि जनजातियों देखने को मिलती हैं। इस राज्य मे राज्य में शास्त्रीय, लोक और आदिवासी संगीत अति प्रसिद्ध है। वे पत्तियों, फलों के बीजों, बर्तनों, धूपदानों आदि से संगीत बनाते हैं। उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाद्य यंत्र अपने आप में असाधारण हैं। सिंघा शायद मनुष्य द्वारा बनाया गया पहला वाद्य यंत्र है, पुंगई या बीन भारत में जोगियों और सपेरों के बीच लोकप्रिय है, मारिया पीतल की भव्य रूप से सजी तुरही और अन्य तालवाद्य हैं, ऑटोफोनिक वाद्य यंत्रों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। और अधिक देखें: Bharat Mata YouTube चैनल

मध्य प्रदेश में कई तरह के व्यंजन खाए जाते हैं, जिनमे भुट्टे का कीस, पोहा, दाल बाफ़ला, मालपुआ, पापड़ की सब्ज़ी साबूदाना खिचड़ी, और पालक पुरी पूरी दुनिया मे मशहूर है।

मध्य प्रदेश के पारंपरिक आभूषण कला का एक अद्वितीय और रंगीन संसार है, जिसमें कीमती पत्थरों और मोतियों से सजे सोने और चांदी के भव्य आभूषण प्रमुख स्थान रखते हैं। इन आभूषणों पर इनेमल का बारीक काम किया जाता है, जिससे वे न केवल खूबसूरत बल्कि अद्वितीय भी बन जाते हैं।

इंदौर और रीवा के बाजार इन आभूषणों की चमक से जगमगाते हैं, जहाँ लाख की चूड़ियाँ और अन्य आभूषण विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। पारंपरिक डिजाइनों में सोने और चांदी के चोकर, मोती, चेन, झुमके और बालों के आभूषण प्रमुख हैं। मंगलसूत्र और हंसुली यहाँ के आभूषणों की विशेष विशेषता हैं, ये आभूषण न केवल पारंपरिक परिधानों को सुंदरता प्रदान करते हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी संजोते हैं।

बस्तर क्षेत्र की बात करें तो यहाँ के आभूषण अपने रंग, आकार और विविधता के लिए मशहूर हैं। यहाँ घास, मोती और बेंत का उपयोग करके तैयार किए गए आभूषण विशेष रूप से आकर्षक होते हैं। बस्तर की महिलाएँ खिल्ली वाला कड़ा (कलाई का कड़ा), दाल और कावली (चूड़ियाँ), तागाली (हार), पान वाला हार, झुमकी (झुमके), और सर्पिल आकार की अंगूठियाँ जैसे आभूषण पहनती हैं। इनके अलावा, आदिवासी महिलाएँ कभी-कभी एक रुपये के सिक्के से सिलकर बनाए गए हार भी पहनती हैं, जो उनकी सृजनात्मकता और संसाधनशीलता का परिचायक है।

इन आभूषणों की कला और शिल्प न केवल भव्यता में समृद्ध है, बल्कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक हस्तकला को भी उजागर करती है। 

मध्यप्रदेश का देश में खनिजों के उत्पादन में चौथा और खनिजों से प्राप्त होने वाले राजस्व में दूसरा स्थान है। मध्य प्रदेश को कोयले से सबसे अधिक रॉयल्टी प्राप्त होती है, इसके बाद चूना पत्थर, तांबा, बॉक्साइट और मैंगनीज का स्थान आता है। यहाँ का पन्ना जिला अपने हीरों की खदानों के लिए पूरी दुनिया मे जाना जाता है। भारत के सबसे ज्यादा हीरे यहीं पर मिलते हैं।

साहित्य और कला

मध्य प्रदेश के लोक नृत्य विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का अद्वितीय प्रतिनिधित्व करता है। इस राज्य मे गौर, मुरिया, सुग्गा, सैला, कर्मा, काकसार, चिथिरई उत्सव नृत्य उल्लेखनीय हैं और उनके अपने अर्थ हैं। यहाँ के लोक नृत्य जीवंत रंगों, अनूठी पोशाकों और मधुर संगीत से परिपूर्ण होते हैं, जो उन्हें विशेष और उत्कृष्ट बनाते हैं। 

गौर नृत्य एक पारंपरिक उत्सव नृत्य है, जिसमें रंग-बिरंगे परिधानों और उत्साहपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का जश्न मनाया जाता है। यह नृत्य समुदाय की एकता और समर्पण को दर्शाता है।

मुरिया नृत्य आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें महिलाएँ झूमते हुए और सुंदर पारंपरिक परिधान पहनकर, अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। यह नृत्य उत्सव और खुशियों के अवसर पर खास रूप से किया जाता है।

सुग्गा नृत्य मध्य प्रदेश की लोककला की एक और खूबसूरत उदाहरण है। यह नृत्य मुख्यतः त्योहारों और सामाजिक समारोहों के दौरान प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें संगीत और रंगों का सम्मिलन नृत्य को एक अलग ही चमक देता है।

सैला नृत्य पर्वतीय इलाकों की एक खास शैली है, जिसमें लोग समूह में नृत्य करते हैं और अपने लोकगीतों के साथ मनोरंजन करते हैं। यह नृत्य गांवों की खुशहाली और सामूहिक संस्कृति को उजागर करता है।

कर्मा नृत्य कृषि और प्राकृतिक बदलावों के प्रति सम्मान प्रकट करता है। यह नृत्य खासतौर पर फसलों की कटाई के समय किया जाता है और इसमें संगीत, नृत्य और धार्मिक अनुष्ठान शामिल होते हैं।

काकसार नृत्य मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों का पारंपरिक नृत्य है, जिसमें लोग अपने सामूहिक अनुभवों और परंपराओं को एक जीवंत और आनंदमयी तरीके से प्रस्तुत करते हैं।

चिथिरई उत्सव नृत्य त्योहारों और धार्मिक उत्सवों के समय होता है, जिसमें स्थानीय लोग पारंपरिक परिधान पहनकर नृत्य करते हैं और धार्मिक संगीत के साथ उत्सव की खुशियाँ मनाते हैं।

इन सभी लोक नृत्यों के माध्यम से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का एक रंगीन और जीवंत चित्र प्रस्तुत होता है। ये नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक हैं।

इस राज्य की बेहतरीन कलाकृतियाँ दुनिया भर में दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यहाँ की बुनी हुई सूती या रेशमी साड़ियाँ, ब्लॉक प्रिंट वाले कपड़े, भरवां खिलौने, फर्श कवरिंग, बांस का काम, बेंत का काम, जूट का काम, लकड़ी का काम, लौह शिल्प, पत्थर शिल्प, धातु शिल्प, टेरा कोटा, ज़री का काम, और लोक चित्रकारी अति प्रसिद्ध हैं।

मध्य प्रदेश की जनजातियाँ और लोक संस्कृति

“अतुल्य भारत के हृदय” मध्य प्रदेश के हर कोने में चहल पहल देखने को मिलती है। यहाँ के त्यौहारों की संख्या बहुत दूर-दूर तक फैली हुई है। चाहे वह कोई संगीत सभा हो, आदिवासी फसल उत्सव हो या कोई धार्मिक आयोजन हो – मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को हर साल लोगों की भीड़ से जगमगाते हुए देखा जाता है। इस राज्य मे होली, दिवाली, दश्हेरा, जैसे पारंपरिक त्योहारों के अलावा, लोकरंग महोत्सव, हरेली, अखिल भारतीय कालिदास समारोह, खजुराहो महोत्सव, भगोरिया हाट महोत्सव, उज्जैन कुंभ मेला, मालवा उत्सव, चेतियागिरी विहार महोत्सव, तानसेन संगीत समारोह, ध्रुपद समारोह, राष्ट्रीय हिन्दी नाट्य समारोह, बुंदेली उत्सव आदि प्रमुख हैं।

इस राज्य मे भारत के कई प्रमुख शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान है जिनमे IIM इंदौर, IIT इंदौर, AIIMS भोपाल, IISER भोपाल, IITTM ग्वालियर, आदि शामिल हैं जो भारत के भविष्य को आकार देने हेतु कार्यरत हैं। एक रोचक तथ्य है की इस राज्य के सिंघरौला जिले के बुंदेला मे वीणा वंदिनी नाम का एक ऐसा स्कूल है जहाँ हर बच्चे को दोनों हाथों से लिखना आता है।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश एक अद्वितीय ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों का संगम है। यदि आप ऐतिहासिक स्थलों, नदियों और वनों से प्रेम करते हैं, तो मध्य प्रदेश की यात्रा अवश्य करें

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