विश्व में हिंदुत्व | सनातन धर्म और संस्कृति की वैश्विक आस्था | Hinduism's Global Impact | BharatMata
सनातन धर्म का अर्थ और महत्त्व
सनातन का अर्थ है जो सदा के लिए है, शाश्वत है और सत्य है। इसके मूल मे ‘'वसुधैव कुटुंबकम'’ का भाव निहित है। सनातन का स्पष्ट संदेश है की हम सकल विश्व के प्रति ‘परिवार भाव’ रखते हैं। मानव जीवन के लिए यह अंधकार से प्रकाश की ओर एक निरंतर यात्रा है। हम सभी धर्मों को ईश्वर प्राप्ति के मार्ग के रूप मे स्वीकार भी करते हैं और उनका सम्मान भी करते हैं। भारत दर्शन | Bharat Mata YouTube चैनल | Bharat Mata वेबसाइट
विश्व में सनातन धर्म की स्वीकार्यता
अति प्राचीन और उत्कृष्ट होने के कारण इसे विश्व ने अपनाया भी और सर्वोत्तम संस्कृति के रूप मे स्थान भी दिया। विश्व के अनेक ऐसे देश हैं जहाँ आज अन्य धर्मों को मानने वाले लोग बहुसंख्यक हैं। उनके रीति-रिवाज और उपासना पद्धति भी भिन्न है परंतु फिर भी सनातन धर्म के प्रति उनका प्रेम और निष्ठा आज भी पूर्ववत ही है। इस क्रम मे आज हम कुछ ऐसे देशों की चर्चा करेंगे जहाँ सदियों की विभिन्नताओं के बाद भी सनातन के प्रति आस्थान जीवंत है।
इंडोनेशिया और सनातन धर्म
इतिहास के पृष्ठों ने इंडोनेशिया को अतीत मे एक हिन्दू राष्ट्र की संज्ञा ही है, किन्तु आज यह मुस्लिम बाहुल्य राष्ट्र है किन्तु इसके कण-कण मे आज भी सनातन ही बसता है। इंडोनेशिया की करन्सी मे आज भी गणपती चित्रित हैं और उनकी एयरलाइन्स मे भगवान श्री हरि विष्णु के वाहन गरुड ने दर्शन होते हैं।
इस देश्वसियों की हिन्दू देवी, देवताओं के प्रति इतनी गहरी आस्था और भक्ति भाव है की वहाँ के सबसे विनाशकारी और active volcano mount bromo के ऊपर श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है जो पिछले कई सदियों से इनकी रक्षा कर रही है।
बाली नामक द्वीप मे, आज भी हिन्दू उपासना पद्धति का ही पालन होता है और यहाँ अनेकानेक हिन्दू मंदिरों मे सनातन संस्कृति के प्रति प्रेम और अनुराग को प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। विश्व की सबसे ऊंची श्री हरि विष्णु की मूर्ति भी यहाँ स्थापित है। विश्व की सबसे ऊँची भगवान विष्णु की मूर्ति 'Statue of Garud' यहीं स्थित है। आज यहाँ के कई प्रसिद्ध मंदिर, विश्व धरोहरों मे स्थान रखते हैं। इनको देखकर अपनी संस्कृति पर गर्व होता है।
श्रीलंका में सनातन धर्म का प्रभाव
-
श्रीलंका की 71% आबादी बौद्ध धर्म को मानती है, लेकिन 12% हिंदू आबादी यहाँ दूसरे स्थान पर है।
-
श्री राम और माता सीता से जुड़ा यह देश रामायण का अभिन्न अंग है।
-
अनेक प्राचीन मंदिर यहाँ सनातन आस्था के प्रतीक हैं।
जापान और हिंदू संस्कृति
अन्य कई देशों की ही भांति जापान के लोग भी सनातन धर्म से बहुत प्रभावित है। संस्कृत भाषा मे लिपिबद्ध पुस्तक ‘सुवर्ण प्रभा सूत्र’ या ‘Golden Light Sutra’ के जापानी भाषा मे अनुवाद ने जापान को सनातन संस्कृति की ओर प्रेरित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। मूर्ति निर्माण से लेकर पूजा- अर्चना की विधियाँ भी जापानी जन जीवन का हिस्सा बनी यहाँ पर जिन चार हिन्दू देवी-देवताओं का प्रमुखता से पूजन होता है, वह है माता लक्ष्मी, देवी सरस्वती, विघ्न विनाशक श्री गणेश जी और श्री हरि विष्णु इसके अतिरिक्त श्री ब्रह्म जी और भगवान शिव की मूर्तियाँ भी पूजित है।
धरोहर के रूप मे हिन्दू धर्म के कई प्राचीन मंदिर भी यहाँ स्थित हैं। यह सत्य है की देव मूर्तियाँ भारत मे उपलब्ध प्रतिमाओं की ही प्रतिछवि है परंतु इसके नाम जापान मे भाषा और परिवेश के अनुसार रखें गए हैं।
-
जापान में प्रमुख हिंदू देवी-देवता:
-
सरस्वती - बेनज़ाइटन
-
गणेश - कांगितेन
-
लक्ष्मी - किचिजोटेन
-
शिव - दैकोकुटेन
-
कुबेर - बिशा मून
-
के नाम से संबोधित करते हैं।
अमेरिका और हनुमान जी का रहस्य
पूर्वी और पश्चिमी सभ्यता मे सदा से ही सांस्कृतिक विरोधाभास रहा है। अनेकानेक विषमताओं के कारण यह अंतर स्पष्ट रूप से देखा भी जा सकता है। विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के अनुसार लगभग 9 लाख वर्ष पूर्व यहाँ एक वानर सभ्यता विकसित थी। जिसका सीधा संबंध रामभक्त हनुमान से है। इस सभ्यता को कपि कहा जाता है।
प्रसिद्ध शोधकर्ता Charles Lindberg ने इस रहस्यमयी सभ्यता की खोज की उन्होंने एक विशालकाय वानर मूर्ति की भी खोज की। यह इतनी विशाल और पुरातन है की लगता है की इसका निर्माण लाखों वर्ष पूर्व हुआ होगा। lost city of monkey god की खोज ने सारे विश्व का ध्यान सनातन की ओर आकर्षित किया। हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार वानरों के साम्राज्य की राजधानी किष्किन्धा को माना गया है। बाली और सुघरीव के साम्राज्य का यही स्थान था।
हनमान जी अपने बेटे मकरध्वज को बचाने पाताल लोक गए तो यहीं आए थे जो ब्राजील के जंगलों मे स्थित है। मकरध्वज की रक्षा के बाद उन्होंने उसे यहाँ का अधिपति घोषित किया था। संभवतः तभी से यहाँ हनुमान जी को परम शक्ति के रूप मे पूजा जाने लगा होगा।
थाईलैंड और सनातन धर्म
विघ्न विनाशक श्री गणेश की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा थायलैंड मे स्थित है। थायलैंड के सरकारी stamps मे भी हिन्दू देवी-देवताओं की फोटो है। आश्चर्य का विश्व तो यह है की यहाँ के मंदिरों मे भगवान शिव की पूजा मे केवल फूल हार ही नहीं चढ़ाए जाते बल्कि पूर्ण आस्था से शिवलिंग पर दूध भी चढ़ाया जाता है। यहाँ के लोकप्रिय नाटकों का आधार भी रामायण के ही प्रसंग है। थायलैंड का राष्ट्रीय ग्रंथ भी रामायण है, जिसे थाई भाषा मे ‘रामाकिन’ कहते हैं। प्राचीन इतिहास मे यह देश एक हिन्दू राष्ट्र है।
कंबोडिया का सनातन इतिहास
अतीत मे कंबोज देश, फिर कंपूजिया और आज कंबोडिया के नाम se प्रसिद्ध इस देश मे मात्र 1500 हिन्दू रहते हैं। माना जाता है की पहली शताब्दी मे कंबोडि नामक ब्राह्मण ने यहाँ हिन्दू राज्य की स्थापना की थी। जिनके नाम पर ही इस देश का नाम कंबोडिया पड़ा इस देश की नीव भारत के शिव भक्त राजा कंबोज ने रखी थी। विशाल मंदिरों की श्रंखला और उनमे अटूट आस्था से यह परिभाषित होता है की कभी यह हिन्दू राष्ट्र था।
यहाँ बजरंग बली हनुमान जी का विशेष प्रभाव है। सं 1965 मे सरकार ने इनके चित्र से अंकित 5 stamps भी निकाले थे। इसके अतिरिक्त सीता-राम लव-कुश आदि के चित्रों के साथ भी stamp चलाए गए।
ऑस्ट्रेलिया में सनातन धर्म का प्रभाव
हिन्दू धर्म के प्रति लागाव ऑस्ट्रेलिया मे बहुत तेजी से बढ़ रहा है। क्रिस्टीयन्स की संख्या किसी समय पर 90% थी परंतु वर्तमान मे यह 44% है। हिंदुओं की संख्या वर्तमान मे 7 लाख से करीब है जबकी पहले यह संख्या 4 लाख 35 हज़ार ही थी।
अन्य देशों में सनातन धर्म का प्रभाव
-
ब्रिटेन और मॉरीशस में हिंदू धर्म तेजी से विकसित हो रहा है।
-
रूस में आधी से अधिक आबादी हिंदू धर्म के प्रति आकर्षित हो रही है।
सनातन धर्म केवल भारत तक सीमित नहीं है बल्कि विश्व के अनेक देशों में इसकी गहरी जड़ें हैं। भारत दर्शन के माध्यम से आप सनातन संस्कृति की इस अद्भुत यात्रा को और विस्तार से जान सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए Bharat Mata YouTube चैनल और Bharat Mata वेबसाइट पर विजिट करें।