मोरारजी देसाई: 1978 की पहली नोटबंदी | भारत रत्न | Emergency के खिलाफ सबसे बड़ा फैसला

 

भारत में नोटबंदी का पहला कदम (1978)

वर्ष 2016 मे जब नरेंद्र मोदीजी ने नोटबंदी की घोषणा की, तो पूरे देश मे हलचल मच गई लेकिन आपको बता दें की ये कोई नई बात नहीं थी। इससे पहले, वर्ष 1978 में मोरारजी देसाईजी ने देश में पहली बार नोटबंदी लागू की थी।

मोरारजी देसाई: प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

मोरारजी देसाई का जन्म वलसाड, गुजरात में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने कठिन परिश्रम और ईमानदारी का पाठ सीखा। उन्होंने सेंट बसार हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में बॉम्बे प्रांत की विल्सन सिविल सर्विस से स्नातक किया। 1918 में बॉम्बे प्रांत की विल्सन सिविल सर्विस से स्नातक होने के बाद, मोरारजी ने लगभग बारह वर्षों तक डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्य किया, जहाँ उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में गहरी समझ और निष्ठा दिखाई।

लेकिन कुछ समय बाद गांधीजी के आह्वान पर उन्होंने ब्रिटिश वस्त्रों का बहिष्कार किया और खादी पहनना शुरू किया। यह उनका देश के प्रति अडिग समर्पण था!

मोरारजी देसाई की राजनीतिक यात्रा

  • 1952 – मुंबई के मुख्यमंत्री बने।
  • 1956 – केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री बने।
  • 1958 – भारत के वित्त मंत्री नियुक्त हुए और 10 बार केंद्रीय बजट पेश किया।
  • 1967 – उपप्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बने।
  • 1977 – देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।

मोरारजी ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और सिविल सर्विसेज में अपने अनुभव से राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। 1952 में वे मुंबई के मुख्यमंत्री बने, और 1956 में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया। 1958 में जब उन्हें वित्त मंत्री नियुक्त किया गया, तो उन्होंने इतिहास रच दिया। उन्होंने संसद में दस बार केंद्रीय बजट प्रस्तुत किए और कई महत्वपूर्ण नीतियाँ लागू कीं, जिनसे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और देश आत्मनिर्भर की राह पर अग्रसर हुआ।

मोरारजी के फैसलों के कारण, भारत में उत्पादन बढ़ा और आयात पर निर्भरता घटने लगी। उनके कार्यों से प्रभावित होकर, इंदिरा गांधी ने उन्हें वित्त मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में 1967 में नियुक्त किया। लेकिन समय के साथ मोरारजी ने महसूस किया कि उनकी और इंदिरागांधी की दृष्टि में फर्क था, इसलिए उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। मोरारजी का विश्वास था कि आर्थिक प्रगति और शांति ही असली उद्देश्य होना चाहिए, और सत्ता पाने के लिए किसी भी प्रकार के बल का इस्तेमाल करना उनका मार्ग नहीं था। जब इंदिरा गांधी ने emergency लगाई, तो उन्होंने जनता पार्टी के साथ मिलकर इंदिरा के खिलाफ 1977 में चुनाव लड़ा, और जनता ने भारी बहुमत से उन्हें विजयी बनाया। मोरारजी देसाई 1977 में देश के पहले गैर-कांग्रसी प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने emergency को समाप्त किया, मीडिया सेंसरशिप को हटाया और लोगों को उनकी स्वतंत्रता वापस दी।

प्रधानमंत्री के रूप में मोरारजी देसाई की उपलब्धियाँ

  • आपातकाल की समाप्ति – उन्होंने आते ही आपातकाल हटाया और मीडिया सेंसरशिप को समाप्त किया।
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम – 1978 में ₹1000, ₹5000 और ₹10,000 के नोटों को अमान्य घोषित किया
  • भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत किया – 1978 में जिमी कार्टर को भारत आने का निमंत्रण दिया।
  • भारत-पाकिस्तान कूटनीतिअटल बिहारी वाजपेयी को पाकिस्तान भेजा और दिल्ली-लाहौर ट्रेन सेवा शुरू की।

प्रधानमंत्री के रूप में श्री मोरारजी देसाई का दृढ़ विश्वास था कि भारत के नागरिकों को इतना निर्भीक बनाना चाहिए कि यदि देश के सर्वोच्च पदाधिकारी भी गलत काम करें, तो समाज का सबसे साधारण व्यक्ति भी उन्हें उसी तरह चुनौती देने में सक्षम हो। उनका हमेशा यही कहना था, "कोई भी व्यक्ति, यहां तक कि प्रधानमंत्री भी, देश के कानून से ऊपर नहीं हो सकता।"

उनके लिए सत्य कोई कागजी सिद्धांत नहीं था, बल्कि यह उनके जीवन का आधार था। वे कभी अपने सिद्धांतों को परिस्थिति की जरूरतों के आगे झुकने नहीं देते थे। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, मोरारजी जी अपने विश्वासों से कभी डिगे नहीं। जैसा कि उन्होंने कहा था, "जीवन में हमें सत्य और अपने विश्वास के अनुरूप ही कार्य करना चाहिए।"

मोरारजी देसाई ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूत किया और 1978 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को भारत आने का निमंत्रण दिया। इसके अलावा, उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम उठाया और 1978 में 1000, 5000 और 10,000 रुपये के नोटों की वापसी की घोषणा की। यह कदम काले धन को नियंत्रित करने के लिए था। पाकिस्तान के साथ रिश्तों में भी सुधार के लिए उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी जी को पाकिस्तान भेजा और दिल्ली-लाहौर ट्रेन सेवा शुरू की।

भारत और भारतवासियों पर अपना सम्पूर्ण जीवन न्योछावर कर देने वाले मोरारजी देसाई कोभारत सरकार ने वर्ष 1991 मे भारत रत्न से सम्मानित किया, वहींपाकिस्तान ने भी उन्हें निशान-ए-पाकिस्तान जैसे सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया। उनकी नीतियाँ और कार्य आज भी भारतीय राजनीति में अहम माने जाते हैं।

मोरेजी देसाई का निधन 10 अप्रैल 1995 को मुंबई में हुआ। उन्होंने अपना जीवन देश की समृद्धि के लिए समर्पित किया और भारतीय राजनीति में अपना अमिट योगदान दिया।

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