विश्व के प्रसिद्ध मंदिर: हिंदू धर्म की अद्भुत धरोहर | जानें इनके इतिहास और महत्व

विश्व के प्रसिद्ध हिंदू मंदिर

सनातन धर्म, जिसे हिंदू धर्म भी कहा जाता है, विश्व का एक प्राचीन और अमिट धर्म है, जो केवल प्रभु के प्रति भक्ति नहीं, बल्कि समस्त जीवों के प्रति प्रेम, श्रद्धा और सम्मान का संदेश देता है। 'वसुधैव कुटुंबकम' का सिद्धांत सनातन धर्म में निहित है, जो यह बताता है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है। यह धर्म शांति, सद्भाव और करुणा का प्रतीक है, जो न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में फैल चुका है। इसके अंतर्गत, कई ऐतिहासिक और अद्भुत मंदिर बने हैं, जो न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि अपनी वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया

अंकोरवाट मंदिर, जो कंबोडिया में स्थित है, सनातन धर्म का एक अद्वितीय प्रतीक है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसकी वास्तुकला विश्वभर में प्रशंसा का विषय है। 12वीं शताब्दी में राजा सूर्यवर्मन द्वितीय द्वारा इसका निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन इसका समापन उनके भांजे धर्मेंद्र वर्मन के शासनकाल में हुआ।

यह मंदिर 1,62,600 वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। अंकोरवाट मंदिर का शिल्पकला, इसकी विशालता और यहां का अद्भुत सूर्यास्त एवं सूर्योदय का दृश्य, इसे पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाते हैं।

अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली

दिल्ली में स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है। यह मंदिर 10,000 वर्षों से भी अधिक की भारतीय संस्कृति और कला का प्रतीक है। अक्षरधाम मंदिर अपनी भव्यता, वास्तुशिल्प और ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी के लिए प्रसिद्ध है, जो भारतीय धर्म, संस्कृति और इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

यह मंदिर न केवल धार्मिक पूजा के लिए है, बल्कि यहां आने वाले पर्यटक भारतीय कला, संगीत और दर्शन का भी गहरा अनुभव प्राप्त करते हैं। यहां के जल शो और प्रदर्शनी भी भारतीय संस्कृति की महिमा का अहसास कराते हैं। अक्षरधाम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है।

चिदंबरम मंदिर, तमिलनाडु

चिदंबरम मंदिर, जो तमिलनाडु के चिदंबरम में स्थित है, भगवान शिव के 'नटराज' रूप को समर्पित है। यह मंदिर पांच प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है, और यहां भगवान शिव आकाश तत्व का रूप धारण किए हुए हैं। इस मंदिर का क्षेत्रफल लगभग 1,06,000 वर्ग मीटर है और यह शैव एवं वैष्णव पूजा दोनों का संगम स्थल है।

चिदंबरम मंदिर की वास्तुकला अद्वितीय है, जिसमें भगवान शिव के नृत्य मुद्राओं को उकेरा गया है। इस मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि यहां शिव और विष्णु दोनों की पूजा एक साथ की जाती है, जो धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है। यह मंदिर हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।

श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के श्रीरंगम में स्थित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, भगवान विष्णु के अवतार श्री रंगनाथ को समर्पित है। यह मंदिर द्रविड़ शैली की वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण है और दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों में से एक है। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार 'राजगोपुरम' कहलाता है, जो लगभग 73 मीटर (239 फीट) ऊंचा है।

यह मंदिर भगवान श्री रंगनाथ की विशाल मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें वह शेषनाग की शैया पर स्थित हैं। मंदिर परिसर में विभिन्न ऐतिहासिक शिलालेख पाए जाते हैं, जो चोला, पंड्या, हौसला और विजयनगर साम्राज्यों के शासनकाल की गवाही देते हैं। श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, भारतीय वास्तुकला और धार्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बेलूर मठ, पश्चिम बंगाल

बेलूर मठ, जो पश्चिम बंगाल के हुगली नदी के किनारे स्थित है, रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित किया गया था। यह मठ 1899 में स्थापित हुआ था और आज यह रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है।

बेलूर मठ, विशेष रूप से अपनी शांतिपूर्ण वातावरण और भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यहां श्री रामकृष्ण परमहंस, मां शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद की मूर्तियां स्थित हैं। यह मठ विश्वभर से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए एक स्थान है, जहां वे शांति, ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते हैं।

निष्कर्ष

ये मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि भारत और विश्व की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रत्येक मंदिर अपनी स्थापत्य कला, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। सनातन धर्म की यह अद्भुत और दिव्य महिमा, न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में फैली हुई है, जो हमें यह सिखाती है कि आध्यात्मिकता और संस्कृति का कोई भूगोल नहीं होता।

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