भारत माता मंदिर – आस्था और राष्ट्र प्रेम का संगम | Haridwar | Bharat Mata
भारत माता मंदिर – आस्था और राष्ट्र प्रेम का संगम
पवित्र पावन शब्द मंदिर वास्तव में उपासना स्थल के रूप में परिभाषित है, साथ ही आस्था के प्रतीक चिन्ह के रूप में भी इन्हें जाना जाता है।
भारत की प्राचीनतम समृद्ध संस्कृति ने सम्पूर्ण भारत भूमि को ही एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र बना दिया कि यह सम्पूर्ण विश्व के लिए एक पावन "देवस्थान" के रूप में अलंकृत है। भारत भूमि की इसी अलौकिक अवधारणा ने इसे विश्व गुरु के गौरव से सम्मानित किया।
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भारत माता मंदिर का महत्व और उद्देश्य
भारत की विविधता और अनेकता में विभिन्न धर्मों, सम्प्रदायों और मतों का अस्तित्व रहा है, किन्तु राष्ट्र-धर्म ही सर्वोच्च धर्म और भारतीयता ही हमारी पहचान रही है।
राष्ट्र प्रेम की इसी भावधारा से भारत माता मंदिर का उद्भव हुआ और श्रद्धेय गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज के अथक प्रयासों से इसे साकारता प्राप्त हो सकी। सदियों तक आने वाली पीढ़ियाँ उनके इस उपकार के लिए उनकी कृतज्ञ रहेंगी।
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भारत माता मंदिर की स्थापना और संरचना
भारत माता की भव्य मूर्ति (भूतल)
भारत माता मंदिर के भूतल पर प्रमुखता से भारत माता की भव्य मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति राष्ट्रीय प्रेम और देश के प्रति अपार श्रद्धा की परिचायिका है।
शूर मंदिर (प्रथम तल)
इसमें महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविन्द सिंह, महारानी लक्ष्मी बाई, चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, वीर सावरकर आदि महापुरुषों की प्रतिमाएँ स्थापित हैं।
मातृ मंदिर (द्वितीय तल)
यहाँ मीराबाई, सती अनुसूया, मैत्रेयी, गार्गी, उर्मिला, मदालसा, सावित्री, पद्मिनी, भगिनी निवेदिता आदि मातृ शक्तियों की प्रतिमाएँ प्रतिष्ठापित हैं।
संत मंदिर (तृतीय तल)
इसमें आदि गुरु शंकराचार्य, संत तुलसीदास, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, अब्दुल रहीम खानखाना, महर्षि वाल्मीकि आदि की प्रतिमाएँ स्थापित हैं।
संस्कृति मंडपम (चतुर्थ तल)
इसमें सनातन धर्म, इस्लाम, पारसी, ईसाई, बौद्ध, जैन, सिक्ख धर्मों के मूल मंत्र रजत पट्टिकाओं पर अंकित हैं।
शक्ति मंदिर (पंचम तल)
यहाँ आदि शक्ति दुर्गा के नौ रूपों के साथ सरस्वती, गायत्री, गंगा, यमुना की प्रतिमाएँ प्रतिष्ठित हैं।
विष्णु मंदिर (षष्ठम तल)
इसमें भगवान लक्ष्मी नारायण, राधा कृष्ण, सीता राम, श्री नाथ जी आदि की प्रतिमाएँ हैं।
शिव मंदिर (सप्तम तल)
इसमें नटराज, शिव, अर्धनारीश्वर, शिव परिवार आदि प्रतिष्ठित हैं। यहाँ से पतित पावनी गंगा की सप्तधाराओं का दर्शन होता है।
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भारत माता मंदिर – राष्ट्रीय एकता का प्रतीक
यह मंदिर सभी धर्मों, सम्प्रदायों और मतों को एक साथ जोड़ता है। यहाँ सिक्ख, ईसाई, इस्लाम, पारसी आदि धर्मों के मूल मंत्रों को रजत पट्टिकाओं पर अंकित किया गया है।
भारत माता मंदिर का ऐतिहासिक योगदान
भारत माता मंदिर विशेष रूप से उन ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
निष्कर्ष – भारत माता मंदिर की महानता
संक्षेप में, यदि भारत माता मंदिर की व्याख्या करनी हो तो इसे संघनित भारत की संज्ञा से विभूषित किया जा सकता है।
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भारत माता मंदिर के निर्माता परम श्रद्धेय गुरुजी स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज के श्री चरणों में Bharat Mata परिवार की ओर से शत-शत नमन एवं वंदन।