द्वारका: भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र नगरी और द्वारकाधीश मंदिर का इतिहास
गुजरात के अहमदाबाद से लगभग 380 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। द्वारका वही द्वारका जो हिंदुओं की आस्था के प्रसिद्ध चार धामों में से एक है वही द्वारका जिससे द्वारकापुरी कहा जाता है और सप्तपुरी ओं में शामिल किया जाता है। वही द्वारका जिसे मथुरा छोड़ने के बाद स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने हाथों से बसाया था वही द्वारका जो आज कृष्ण भक्तों सहित हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए एक महान तीर्थ है।
द्वारकाधीश मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
माना जाता है कि लगभग 5000 साल पहले जब भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका नगरी को बसाया था तो उसमें जिस स्थान पर उनका निजी महल यानी खारी ग्रह था वहीं पर द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण हुआ। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के अपने धाम गमन करने के पश्चात उनके साथ ही उनके द्वारा बसाई गई द्वारका नगरी भी समुद्र में समा गई थी। मंदिर के वर्तमान स्वरूप को 16वीं शताब्दी के आसपास का बताया जाता है।
द्वारकाधीश मंदिर की वास्तुकला
वास्तुकला के नजरिए से भी द्वारकाधीश मंदिर को बहुत ही उत्कृष्ट माना जाता है। मंदिर पर कोटे से घिरा है। मंदिर के चारों दिशाओं में चार द्वार हैं, जिनमें उत्तर और दक्षिण में स्थित मुख्य स्वर्गद्वार आकर्षक मंदिर के साथ मंगला है, जिसके शिखर की ऊंचाई 235 मीटर है। इसके बनाने के ढंग की निर्माण विशेषज्ञता प्रशंसा करते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर का ध्वज
मंदिर के शिखर पर लहराते धर्म ध्वजा को देखकर दूर से ही श्रीकृष्ण के भक्त उनके सामने अपना शीश झुका लेते हैं। यह ध्वजा लगभग 84 फुट लंबी है, जिसमें विभिन्न प्रकार के रंग देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा
मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण की श्याम वर्णित चतुर्भुजी प्रतिमा है जो चांदी के सिंहासन पर विराजमान है। वे अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण किए हुए हैं। इसलिए यहां इन्हें रणछोड़ भी कहा जाता है।
द्वारका में अन्य प्रमुख स्थल
द्वारकाधीश मंदिर के साथ-साथ यहां पर अनेक मंदिर हैं जिनकी अपनी कहानियां हैं। गोमती की धारा पर बने चक्रतीर्थ घाट, अरब सागर और वहां पर स्थित समुद्र नारायण मंदिर कौन से तीर्थ जहां स्नान करने की परंपरा है। शंकराचार्य द्वारा स्थापित शारदा पीठ भी द्वारका धाम की महिमा को दर्शाता है।