माता वैष्णो देवी : काल भैरव माता से शत्रुता के बाद भी पूजित क्यों हैं ? | Vaishno Devi
वैष्णो देवी मंदिर का धार्मिक महत्व
वैष्णो देवी का तीर्थ स्थल भारतीय संस्कृति और आस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अपार शक्ति, पवित्रता और मुक्ति का प्रतीक भी है। इस तीर्थ की विशेषता यह है कि यह स्थान केवल शारीरिक यात्रा के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और भगवत प्रेम की प्राप्ति के लिए भी जाना जाता है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन नवरात्रि के समय इसका विशेष महत्व होता है। इस दौरान चारों ओर का वातावरण भक्ति और आनंद से ओत-प्रोत होता है।
वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू के कटरा नगर के पास त्रिकुटा पर्वत की ऊँचाई पर स्थित है। यह मंदिर समुद्रतल से लगभग 5200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां पर माँ वैष्णो देवी की स्वयंभू तीन मूर्तियां स्थित हैं। ये तीन मूर्तियां देवी काली, देवी सरस्वती और देवी लक्ष्मी के रूप में पिंडी रूप में स्थित हैं, जिन्हें मिलाकर माँ वैष्णो देवी की पूजा की जाती है। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
माँ वैष्णो देवी का जन्म और प्रारंभिक जीवन
ऐसी मान्यता है कि माता वैष्णो देवी का जन्म भारत के दक्षिण में रामेश्वरम के पास हुआ था, जहां उनके माता-पिता संतान के लिए अत्यधिक परेशान थे। कहते हैं कि माता वैष्णो देवी को बचपन में त्रिकुटा नाम से जाना जाता था, और भगवान विष्णु के वंश में जन्म लेने के कारण वे "वैष्णवी" कहलाती थीं।
माता वैष्णो देवी के जीवन से जुड़ी एक प्रमुख कथा यह है कि जब राम ने अवतार लिया, तब देवी त्रिकुटा ने भगवान राम से विवाह की इच्छा जताई थी। भगवान राम ने कहा कि वह पहले से सीता से विवाह कर चुके हैं और एक पत्नीव्रत को लेकर उन्होंने वचन लिया है, जिससे वह देवी त्रिकुटा से विवाह नहीं कर सकते थे। राम ने कहा कि जब वह लंका से लौटेंगे, तो वह देवी त्रिकुटा से मिलेंगे और अगर तब वह उन्हें पहचान पाईं, तो वह उनसे विवाह कर लेंगे। लेकिन जब राम लंका से लौटे, तो देवी त्रिकुटा उन्हें पहचान नहीं पाईं। इसके बाद भगवान राम ने उन्हें एक गुफा में जाकर ध्यान करने को कहा और यह वचन दिया कि जब कलियुग में उनका अवतार होगा, तब वह देवी त्रिकुटा से विवाह करेंगे। यह गुफा त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है, और माना जाता है कि माँ वैष्णो देवी वहां अपने भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।
श्रीधर और माता वैष्णो देवी की कृपा
वैष्णो देवी मंदिर के संबंध में एक और प्रसिद्ध कथा है। यह कथा श्रीधर नामक एक भक्त से जुड़ी है। श्रीधर एक गरीब भक्त था और उसके पास संतान नहीं थी। लेकिन उसके मन में माता वैष्णो देवी के प्रति अपार श्रद्धा थी। एक दिन, माता ने श्रीधर से दर्शन दिए और भंडारे का आयोजन करने को कहा। श्रीधर ने माता की आज्ञा मानी और भंडारे का आयोजन किया। भंडारे के दौरान, माता ने कन्या के रूप में श्रीधर के पास आकर उसे आशीर्वाद दिया। इस भंडारे में एक चमत्कारी घटना घटित हुई, जब भैरवनाथ ने इस कन्या को देखा और समझा कि यह साधारण कन्या नहीं हो सकती। उसने कन्या से मांस और मदिरा मांगने का प्रयास किया, लेकिन कन्या ने उसे समझाया कि यह भव्य भंडारा है और इसमें मांस-मदिरा वर्जित है। भैरवनाथ के गुस्से के कारण वह कन्या को पकड़ने की कोशिश करता है, लेकिन जैसे ही वह कन्या को पकड़ने बढ़ा, वह अचानक गायब हो गई। भैरवनाथ इस कन्या के पीछे भागता हुआ गुफा तक पहुंचा, लेकिन हनुमान जी ने उसे वहां रोक लिया। हनुमान जी और भैरवनाथ के बीच लंबा युद्ध हुआ, जिसमें अंत में माता वैष्णो देवी ने भैरवनाथ को पराजित किया।
माँ वैष्णो देवी के इस संघर्ष को भारतीय संस्कृति में एक उदाहरण के रूप में देखा जाता है, जिसमें भक्ति, शक्ति और सत्य का प्रतीक उभरता है। इसी कारण यह मान्यता है कि माता वैष्णो देवी की यात्रा के बाद भक्त को बिना काल भैरव के दर्शन किए यात्रा अधूरी मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि काल भैरव के दर्शन के बिना माता के दर्शन का फल नहीं मिलता।
वैष्णो देवी के इस पवित्र तीर्थ स्थल की यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक दिशा देने में भी सहायक होती है। इस स्थान पर आने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनका जीवन धन्य हो जाता है। यह स्थान केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक बन चुका है। इसके इतिहास और पौराणिक कथाओं के माध्यम से यह स्थान भारतीय समाज में एक विशेष स्थान रखता है।
वैष्णो देवी यात्रा: श्रद्धा और आस्था का प्रतीक
वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा को लेकर भारतीय समाज में गहरी श्रद्धा और आस्था है। प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं, और नवरात्रि के समय यहाँ विशेष रूप से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यह स्थान न केवल हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि पूरे भारत और दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अपूर्व आस्था का केंद्र बन चुका है।
इस पवित्र तीर्थ स्थल की महत्वता और इसके इतिहास को जानना और समझना हमारे भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। हमें गर्व है कि हम इस तीर्थ स्थल के पवित्रता को संजोने और उसे जन-जन तक पहुंचाने के प्रयासों में हिस्सा ले रहे हैं।