भारत का पहला National Park! | Uttarakhand National Parks & Wildlife Sanctuaries
क्या आपने कभी सोचा है कि भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान कहाँ है? क्या आप जानते हैं कि यहीं से 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत हुई थी? या फिर यहाँ दो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी हैं? अगर नहीं, तो यह video आपके लिए है! आज हम आपको उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य की विशेषताओं के बारे में विस्तार से बताएंगे।
उत्तराखंड में 6 राष्ट्रीय उद्यान, 7 वन्यजीव अभयारण्य, 4 कंजर्वेशन रिज़र्व और 1 बायोस्फीयर रिज़र्व हैं। राज्य का 65% भाग वनों से ढका है जो 34,666 वर्ग किलोमीटर है। यहाँ 102 स्तनधारी, 600 पक्षी, 19 उभयचर, 70 सरीसृप और 124 मछली प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
उत्तराखंड के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
सबसे पहले बात करते हैं जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की, जो भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है। इसकी स्थापना 1936 में हेली राष्ट्रीय उद्यान के नाम से हुई थी और 1957 में इसका नाम प्रसिद्ध शिकारी और संरक्षणवादी जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया।
यह 520.8 वर्ग किलोमीटर में फैला है और नैनीताल जिले में स्थित है। पूरे कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व का क्षेत्रफल 1,318.54 वर्ग किलोमीटर है जिसमें 520 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया और 797.72 वर्ग किलोमीटर बफर एरिया है।
यह पार्क 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर का पहला टाइगर रिज़र्व बना। 2022 की गणना के अनुसार यहाँ 260 बाघ हैं। इसके अलावा यहाँ एशियाई हाथी, बंगाल टाइगर, इंडियन लेपर्ड, जंगल कैट, फिशिंग कैट, बार्किंग डियर, सांभर, हिमालयन गोरल और कई अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं।
यहाँ 586 से ज्यादा पक्षी प्रजातियाँ भी हैं। पार्क को 6 सफारी ज़ोन में बांटा गया है – ढिकाला, बिजरानी, झिरना, दुर्गादेवी, ढेला और सीतावनी।
राजाजी राष्ट्रीय उद्यान
दूसरा महत्वपूर्ण पार्क है राजाजी राष्ट्रीय उद्यान, जो हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी गढ़वाल में 820.42 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसका नाम प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सी. राजगोपालाचारी के नाम पर रखा गया है।
यह तीन अभयारण्यों – राजाजी, मोतीचूर और चिल्ला – को मिलाकर बनाया गया था। 2015 में इसे भारत का 48वाँ टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया।
यहाँ एशियाई हाथियों की बड़ी आबादी, टाइगर, लेपर्ड, किंग कोबरा, पायथन और 400 से ज्यादा पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
वैली ऑफ फ्लावर्स राष्ट्रीय उद्यान
तीसरा सबसे खूबसूरत पार्क है वैली ऑफ फ्लावर्स राष्ट्रीय उद्यान, जो चमोली जिले में 87.5 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
इसे 2005 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया। यह 2,000 से 6,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और नंदा देवी बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है।
यह घाटी जुलाई से अगस्त में जंगली फूलों की 600 से ज्यादा प्रजातियों से भर जाती है।
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान
चौथा पार्क है नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, जो चमोली जिले में 630.33 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
इसे 1982 में स्थापित किया गया और 1988 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया। यह नंदा देवी चोटी (7,816 मीटर) के आसपास स्थित है।
यहाँ स्नो लेपर्ड, हिमालयन मस्क डियर, हिमालयन तहर, ब्राउन बियर और हिमालयन मोनाल जैसे दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं।
गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान
पाँचवाँ पार्क है गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान, जो उत्तरकाशी जिले में 2,390 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
यह गंगोत्री ग्लेशियर और गौमुख के पास स्थित है। यहाँ स्नो लेपर्ड, ब्लैक बियर, ब्राउन बियर, मस्क डियर और हिमालयन तहर पाए जाते हैं।
यहाँ गौमुख और तपोवन के लिए ट्रेकिंग बहुत प्रसिद्ध है।
गोविंद पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान
छठा पार्क है गोविंद पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान, जो उत्तरकाशी जिले में 958 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
यहाँ स्नो लेपर्ड, ब्लू शीप, हिमालयन मोनाल, सेरो, गोरल और ब्राउन बियर पाए जाते हैं।
यहाँ हर की दून, डोडी ताल और कई प्रसिद्ध ट्रेकिंग रूट्स हैं।
उत्तराखंड के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
सोनानदी वन्यजीव अभयारण्य नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल में 301.18 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह 1987 में स्थापित किया गया और कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व का हिस्सा है। यहाँ टाइगर, एशियाटिक एलिफैंट, लेपर्ड, गोरल, बार्किंग डियर, सांभर और कई पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
बिनसर वन्यजीव अभयारण्य अल्मोड़ा में 47.07 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे 1988 में स्थापित किया गया। यह 2,270 मीटर की ऊंचाई पर है और यहाँ से नंदा देवी, केदारनाथ, त्रिशूल जैसी हिमालयी चोटियों का शानदार नज़ारा दिखता है। यहाँ 200 से ज्यादा पक्षी प्रजातियाँ, लेपर्ड, बार्किंग डियर, लंगूर, चीतल, फ्लाइंग स्क्विरल, हिमालयन बियर पाए जाते हैं।
अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य पिथौरागढ़ में 599.93 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे 1986 में अस्कोट मस्क डियर सैंचुरी के नाम से स्थापित किया गया। यहाँ स्नो लेपर्ड, हिमालयन ब्लैक बियर, मस्क डियर, हिमालयन सेरो, गोरल, भराल पाए जाते हैं।
केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य रुद्रप्रयाग में 975.20 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो इसे उत्तराखंड का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य बनाता है। यह केदारनाथ मंदिर के पास स्थित है। यहाँ मस्क डियर, स्नो लेपर्ड, हिमालयन मोनाल, स्नोकॉक पाए जाते हैं।
नंधौर वन्यजीव अभयारण्य नैनीताल में 269.96 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसे 2012 में स्थापित किया गया और 2022 में भारत का तीसरा टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया। यहाँ 200 से ज्यादा पक्षी प्रजातियाँ, टाइगर, जंगली हाथी, लेपर्ड, जंगल कैट, नीलगाय पाए जाते हैं।
उत्तराखंड के संरक्षित क्षेत्र हिमालय की तलहटी से लेकर तराई के मैदानों तक फैले हुए हैं। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता है जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान - भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान और प्रोजेक्ट टाइगर का पहला रिज़र्व। यहाँ दो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट (नंदा देवी और वैली ऑफ फ्लावर्स) हैं। उत्तराखंड के जंगलों में आपको कभी बंगाल टाइगर की दहाड़ तो कभी स्नो लेपर्ड, कभी एशियाई हाथियों का झुंड तो कभी फूलों से भरी घाटी दिखाई देगी। तो अगली बार जब आप उत्तराखंड जाएं, तो इन राष्ट्रीय उद्यानों की सैर ज़रूर करें!
निष्कर्ष
उत्तराखंड के संरक्षित क्षेत्र हिमालय की तलहटी से लेकर तराई के मैदानों तक फैले हुए हैं। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता है जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान – भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान और प्रोजेक्ट टाइगर का पहला रिज़र्व। यहाँ दो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट (नंदा देवी और वैली ऑफ फ्लावर्स) हैं। उत्तराखंड के जंगलों में आपको कभी बंगाल टाइगर की दहाड़ तो कभी स्नो लेपर्ड, कभी एशियाई हाथियों का झुंड तो कभी फूलों से भरी घाटी दिखाई देगी।
तो अगली बार जब आप उत्तराखंड जाएं, तो इन राष्ट्रीय उद्यानों की सैर ज़रूर करें।
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