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Kerala का ये Secret 99% टूरिस्ट नहीं जानते! | Kerala National Parks & Wildlife Sanctuary (Full Tour)

क्या आपने कभी सोचा है कि केरल के घने जंगलों में क्या-क्या छुपा है? क्या आप जानते हैं कि यहीं एक ऐसा अनोखा फूल खिलता है जो सिर्फ 12 साल में एक बार पूरे पहाड़ को नीले रंग से ढक देता है? या फिर यह कि केरल में दुनिया का सबसे पुराना टीक का पेड़ मौजूद है, जिसकी उम्र लगभग 360 वर्ष है?

यदि नहीं, तो यह लेख आपके लिए है। इस यात्रा में हम आपको केरल के सभी राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों की विशेषताओं, उनकी स्थापना, घूमने के सर्वोत्तम समय और वहाँ पाई जाने वाली जैव विविधता से परिचित कराएंगे। आइए शुरू करते हैं “ईश्वर के अपने देश” – केरल की वन्य यात्रा।

केरल के राष्ट्रीय उद्यान और जैव विविधता

केरल में कुल 6 राष्ट्रीय उद्यान, 18 वन्यजीव अभयारण्य और 2 टाइगर रिज़र्व हैं। ये सभी मिलकर पश्चिमी घाट की अद्भुत जैव विविधता को संरक्षित करते हैं और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का हिस्सा हैं।

1. पेरियार राष्ट्रीय उद्यान (Thekkady)

पेरियार राष्ट्रीय उद्यान, जिसे थेक्कडी के नाम से भी जाना जाता है, केरल का सबसे प्रसिद्ध संरक्षित क्षेत्र है। इसकी स्थापना 1950 में हुई थी और यह 925 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह भारत के 51 टाइगर रिज़र्व में से एक है।

प्रमुख आकर्षण:

  • पेरियार झील (1895 में मुल्लापेरियार बाँध से निर्मित)

  • बोट सफारी का अनूठा अनुभव

  • हाथी, बंगाल टाइगर, लेपर्ड, सांभर, गौर, नीलगाय

  • लायन-टेल्ड मकाक और निल्गिरि लंगूर

घूमने का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से जून

2. एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान

1978 में स्थापित एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान, केरल का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। यह मुन्नार से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और लगभग 97 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

विशेषताएँ:

  • अनामुडी चोटी (2,695 मीटर) – दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी

  • लुप्तप्राय निल्गिरि तहर की सबसे बड़ी आबादी

  • नीलकुरिंजी फूल, जो हर 12 वर्ष में एक बार खिलता है

  • एटलस मॉथ – दुनिया की सबसे बड़ी तितलियों में से एक

घूमने का सर्वोत्तम समय: सितंबर–नवंबर, अप्रैल–जून

3. साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान

1984 में स्थापित साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान, केरल के सबसे रहस्यमय और जैविक रूप से समृद्ध उद्यानों में से एक है। यह 237.52 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और निल्गिरि बायोस्फीयर रिज़र्व का कोर एरिया है।

घूमने का सर्वोत्तम समय: दिसंबर से अप्रैल

4. अनामुडी शोला राष्ट्रीय उद्यान

इडुक्की जिले में स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान 2003 में स्थापित किया गया था और इसका क्षेत्रफल 7.5 वर्ग किलोमीटर है। यह अद्वितीय शोला-ग्रासलैंड इकोसिस्टम के लिए जाना जाता है।

घूमने का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च

5. मथिकेट्टन शोला राष्ट्रीय उद्यान

यह पार्क कार्डमम हिल्स रिज़र्व का अंतिम अवशेष है। यहाँ ट्रॉपिकल एवरग्रीन और मॉइस्ट डेसिड्यूअस फॉरेस्ट पाए जाते हैं।

यहाँ पाए जाने वाले प्रमुख जीव:

  • एशियन एलिफैंट, लेपर्ड, सांभर

  • वाइल्ड डॉग, गौर, सिवेट

  • मालाबार पैराकीट, ब्लैक ईगल

घूमने का सर्वोत्तम समय: नवंबर से अप्रैल

6. पंपादुम शोला राष्ट्रीय उद्यान

केरल का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान, जो मात्र 1.32 वर्ग किलोमीटर में फैला है। छोटे आकार के बावजूद, यहाँ घने जंगल और समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है।

परंबिकुलम टाइगर रिज़र्व

2010 में घोषित परंबिकुलम टाइगर रिज़र्व, भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रबंधित टाइगर रिज़र्व में से एक है।

मुख्य आकर्षण:

  • दुनिया का सबसे पुराना टीक का पेड़ कन्निमारा

  • गौर की सबसे घनी आबादी – “गौर की राजधानी”

  • 268 पक्षी प्रजातियाँ और 221 तितली प्रजातियाँ

घूमने का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मई

प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries of Kerala)

केरल में वयनाड, चिन्नार, नेय्यर, अरलम, शेंडुर्नी सहित कई महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्य हैं, जो हाथी और टाइगर कॉरिडोर का अहम हिस्सा हैं।

वयनाड वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी

वयनाड जिले में स्थित वयनाड वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी लगभग 344.44 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। इसकी स्थापना 1973 में हुई थी। यह अभयारण्य निल्गिरि बायोस्फीयर रिज़र्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और कर्नाटक के नागरहोल व बांदीपुर तथा तमिलनाडु के मुदुमलाई वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र हाथियों और बाघों के लिए एक प्रमुख कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है तथा प्रोजेक्ट एलिफैंट के अंतर्गत संरक्षित है।
यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय: जून से अक्टूबर

चिन्नार वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी

इडुक्की जिले में स्थित चिन्नार वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी का क्षेत्रफल 90.44 वर्ग किलोमीटर है। यह पश्चिमी घाट के रेन-शैडो रीजन में स्थित है और तमिलनाडु की सीमा से सटा हुआ है। यहाँ ड्राई थॉर्न फॉरेस्ट, डेसिड्यूअस फॉरेस्ट, शोला और ग्रासलैंड जैसे विविध प्राकृतिक आवास देखने को मिलते हैं। इस अभयारण्य की सबसे बड़ी विशेषता है दुर्लभ ऐल्बिनो गौर (मंजमपट्टी व्हाइट बाइसन), जो केवल यहीं और तमिलनाडु के इंदिरा गांधी वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में पाया जाता है।
घूमने का उत्तम समय: अक्टूबर से मार्च

नेय्यर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी

तिरुवनंतपुरम से लगभग 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नेय्यर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी का क्षेत्रफल 128 वर्ग किलोमीटर है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी और यह केरल का दूसरा सबसे पुराना वन्यजीव अभयारण्य है। यहाँ का मुख्य आकर्षण है स्टीव इर्विन क्रोकोडाइल रिहैबिलिटेशन सेंटर। यहाँ स्लेंडर लोरिस, किंग कोबरा, ट्रावणकोर टॉर्टोइज, लायन-टेल्ड मकाक और एशियन एलिफैंट पाए जाते हैं।
घूमने का सबसे अच्छा समय: सितंबर से फरवरी

अरलम वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी

कन्नूर जिले में तलासेरी से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित अरलम वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी 55 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। इसकी स्थापना 1984 में हुई थी। यहाँ हाथी, लेपर्ड, स्पॉटेड डियर, जंगली सूअर, गौर, जंगल कैट और कई प्रजाति की गिलहरियाँ पाई जाती हैं।
घूमने का उपयुक्त समय: सितंबर से फरवरी

शेंडुर्नी वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी

कोलम जिले में स्थित शेंडुर्नी वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी, अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिज़र्व के अंतर्गत आती है। यहाँ एवरग्रीन लो-लैंड फॉरेस्ट पाए जाते हैं, जो पेरियार नदी की विभिन्न शाखाओं के बीच फैले हुए हैं। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक शांति और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। 

केरल के अन्य प्रमुख अभयारण्य

इनके अलावा केरल में कई अन्य महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्य भी हैं, जैसे—
मंगलावनम बर्ड सैंक्चुरी, कुरिंजीमाला सैंक्चुरी, थट्टेक्कड बर्ड सैंक्चुरी, पीची-वाझानी, पीरामेड हेरॉन्स, पेप्पारा, परम्बिकुलम-आलियार, इडुक्की, मालाबार और नीला वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी।

केरल के जंगल और जैव विविधता

केरल के जंगल पश्चिमी घाट की ऊँची पहाड़ियों से लेकर समुद्री तटों के मैंग्रोव वनों तक फैले हुए हैं। यहाँ ट्रॉपिकल एवरग्रीन, सेमी-एवरग्रीन, मॉइस्ट व ड्राई डेसिड्यूअस, शोला, ग्रासलैंड और मैंग्रोव जैसे विविध वन प्रकार पाए जाते हैं। राज्य की लगभग 39% भूमि वन क्षेत्र से ढकी हुई है।

केरल में लायन-टेल्ड मकाक, निल्गिरि तहर, मालाबार जायंट स्क्विरल, ट्रावणकोर टॉर्टोइज, किंग कोबरा जैसी कई स्थानीय (Endemic) प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यही कारण है कि पश्चिमी घाट को दुनिया के “8 जैव विविधता हॉटस्पॉट्स” में से एक माना जाता है।

निष्कर्ष

अगली बार जब आप केरल जाएँ, तो केवल बैकवाटर्स और समुद्र तटों तक सीमित न रहें। इन राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों की यात्रा करके केरल की असली आत्मा को महसूस करें। जुड़े रहिए भारत माता चैनल के साथ, क्योंकि हम जल्द ही आपको भारत के एक और राज्य की ऐसी ही रोमांचक वन्य यात्रा पर लेकर आएँगे।