मध्य प्रदेश के जंगलों में छुपा है भारत का सबसे बड़ा रहस्य | Tiger State MP | National Parks/Wildlife
मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य भारत की उस जैव विविधता को दर्शाते हैं, जो जंगलों, नदियों और पहाड़ियों में जीवित है। अगर आप भारत की प्रकृति को गहराई से समझना चाहते हैं, तो भारत दर्शन श्रृंखला आपके लिए है।
मध्य प्रदेश के जंगलों में क्या-क्या छुपा है?
मध्य प्रदेश के जंगलों में क्या-क्या छुपा है? क्या आपने कभी सोचा है कि यहाँ कितने टाइगर, लेपर्ड और दुर्लभ जानवरों का घर है? अगर नहीं, तो इस वीडियो को पूरा देखिए, क्योंकि आज हम आपको मध्य प्रदेश के हर बड़े राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य की खासियत, उनकी स्थापना, वहाँ जाने का सबसे अच्छा समय, और वहाँ पाए जाने वाले जानवरों के बारे में बताएँगे।
आपको यहाँ ऐसी जानकारी मिलेगी जो आपको मध्य प्रदेश की जंगली दुनिया का असली अंदाज़ा दे देगी। तो बस बैठिए, और हमारे साथ चलिए मध्य प्रदेश के जंगलों की सैर पर।
क्यों कहा जाता है मध्य प्रदेश को “टाइगर स्टेट”?
मध्य प्रदेश को भारत का “टाइगर स्टेट” कहा जाता है, और यह सच भी है। यहाँ 12 राष्ट्रीय उद्यान और 31 से ज्यादा वन्यजीव अभयारण्य हैं, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का करीब 3.5% हिस्सा कवर करते हैं। यही वजह है कि मध्य प्रदेश भारत के सबसे समृद्ध वाइल्डलाइफ रीजन में गिना जाता है।
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान: टाइगर की सबसे अधिक घनत्व वाली धरती
सबसे पहले बात करते हैं बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान की, जिसकी स्थापना 1968 में हुई थी। यह उमरिया जिले में स्थित है और यहाँ टाइगर की सबसे ज्यादा डेंसिटी है। 2022 में यहाँ 135 टाइगर थे। इसके अलावा गौर, सांभर, बार्किंग डियर और नीलगाय भी यहाँ आसानी से देखे जा सकते हैं। यहाँ आने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से जून तक है, खासकर मार्च से मई में टाइगर स्पॉटिंग के लिए।
बांधवगढ़ का मतलब है “भाई का किला” और मान्यता है कि भगवान राम ने यह किला लक्ष्मण को दिया था। यहाँ 2000 साल पुराने किले के अवशेष, मानव निर्मित गुफाएं, शिलालेख और शैल चित्र भी देखने को मिलते हैं। इसके अलावा, यहाँ भगवान विष्णु की 10वीं शताब्दी की विशाल मूर्ति है और दुनिया का पहला सफेद बाघ ‘मोहन’ यहीं 1951 में देखा गया था।
यहाँ पक्षियों की 250 से ज्यादा प्रजातियाँ भी हैं।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान: “द जंगल बुक” की प्रेरणा
दूसरा सबसे खास राष्ट्रीय उद्यान है कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, जिसकी स्थापना 1955 में हुई थी और यह मंडला और बालाघाट जिले में फैला हुआ है। यह पार्क रुडयार्ड किपलिंग की “द जंगल बुक” की प्रेरणा भी है। यहाँ आपको टाइगर, लेपर्ड, बारासिंघा, गौर, स्पॉटेड डियर, सांभर और स्लोथ बियर भी मिलेंगे। यहाँ भी अक्टूबर से जून तक जाना सबसे अच्छा है।
कान्हा का नाम यहाँ की काली उपजाऊ मिट्टी “कनहार” से पड़ा है। यहाँ का सबसे प्रमुख आकर्षण बारहसिंगा है, जिसे “कान्हा का गहना” भी कहा जाता है। यहाँ बैगा आदिवासी महिलाएँ गाइड का काम करती हैं और बारासिंघा की ब्रेडरी प्रजाति केवल यहीं पाई जाती है।
पेंच, सतपुड़ा और कूनो: जंगलों का वास्तविक अनुभव
पेंच राष्ट्रीय उद्यान (सेओनी और छिंदवाड़ा) 1975 में स्थापित हुआ था। यहाँ टाइगर, लेपर्ड, वाइल्ड डॉग, हायना, जैकल, सांभर, नीलगाय, चिंकारा और वाइल्ड बोअर पाए जाते हैं। यहाँ पक्षियों की 325 से ज्यादा प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं।
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान (1981) ट्रैकिंग, बोट सफारी और नाइट सफारी के लिए जाना जाता है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान (श्योपुर) 2018 में बना और यहाँ भारत का ऐतिहासिक चीता प्रोजेक्ट चल रहा है।
फॉसिल पार्क और दुर्लभ वन्यजीव
धार जिले का फॉसिल राष्ट्रीय उद्यान 6.5 करोड़ साल पुराने डायनासोर फॉसिल के लिए प्रसिद्ध है। घुघुआ फॉसिल राष्ट्रीय उद्यान (डिंडोरी) पेड़-पौधों और जीवों के जीवाश्मों के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है। इसके अलावा माधव राष्ट्रीय उद्यान (शिवपुरी) को हाल ही में देश का 58वाँ बाघ अभयारण्य घोषित किया गया है।
मध्य प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
अचानकमार, बारनावापारा, बोरी, नौरादेही, रातापानी, पचमढ़ी, बालाघाट और ओमकारेश्वर जैसे वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश की जैव विविधता को और मजबूत बनाते हैं।
मध्य प्रदेश की जैव विविधता: भारत का प्राकृतिक खजाना
मध्य प्रदेश के जंगलों में आपको कभी टाइगर, कभी लेपर्ड, कभी बारासिंघा तो कभी दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देगी। यहाँ की खूबसूरती और जैव विविधता देखने लायक है। इसी कारण मध्य प्रदेश को “टाइगर स्टेट” कहा जाता है।
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