भारत का सबसे विशाल टाइगर रिज़र्व || Andhra Pradesh Wildlife Sanctuaries and National Park
क्या आपने कभी सोचा है कि आंध्र प्रदेश के जंगलों में क्या छुपा है? क्या आप जानते हैं कि यहाँ भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिज़र्व है? या फिर यह कि यहाँ दुनिया का एकमात्र स्थान है जहाँ जेर्डन कोर्सर नामक दुर्लभ पक्षी पाया जाता है? अगर नहीं, तो यह video आपके लिए है! आज हम आपको आंध्र प्रदेश के हर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य की विशेषताओं, उनकी स्थापना, वहाँ जाने का सबसे अच्छा समय, और वहाँ पाए जाने वाले जानवरों के बारे में विस्तार से बताएंगे। तो चलिए, शुरू करते हैं आंध्र प्रदेश के वन्य जीवन की अद्भुत यात्रा!
आंध्र प्रदेश के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान (National Parks of Andhra Pradesh)
सबसे पहले बात करते हैं पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान की, जिसकी स्थापना 2008 में हुई थी। यह राजमहेंद्रवरम के पास पापी हिल्स में स्थित है और 1,012.86 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ बंगाल टाइगर, लेपर्ड, हाइना, इंडियन गौर, स्लोथ बियर, स्पॉटेड डियर, सांभर, बार्किंग डियर और चौसिंघा पाए जाते हैं। इसके अलावा यहाँ एक स्थानीय बौनी बकरी प्रजाति कंचू मेखा भी मिलती है जो सिर्फ यहीं पाई जाती है। यहाँ आने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से जून तक है। दूसरा महत्वपूर्ण पार्क है श्री वेंकटेश्वर राष्ट्रीय उद्यान, जो 1989 में स्थापित किया गया था। यह तिरुपति से सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी पर शेषाचलम और तिरुमला पहाड़ियों में 353.62 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। यहाँ की खासियत है लाल चंदन के पेड़, जो विश्व स्तर पर संरक्षित हैं। पक्षियों में ग्रे हॉर्नबिल, पाइड किंगफिशर और कई अन्य प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं। यहाँ आने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मई तक है। तीसरा राष्ट्रीय उद्यान है राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान, जिसे 2005 में स्थापित किया गया था। यह कडप्पा जिले के रामेश्वरम में पेन्ना नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित है और 2.4 वर्ग किलोमीटर के छोटे से क्षेत्र में फैला है।
भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिज़र्व: नागार्जुनसागर–श्रीशैलम
अब बात करते हैं नागार्जुनसागर–श्रीशैलम टाइगर रिज़र्व की, जो भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिज़र्व है। इसकी स्थापना 1978 में हुई थी और 1983 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया। यह 3,727.82 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला है और आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना दोनों राज्यों में फैला हुआ है। 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ 360 से ज्यादा लेपर्ड हैं, जो भारत के सभी टाइगर रिज़र्व में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा यहाँ 80 से ज्यादा बंगाल टाइगर, इंडियन पैंगोलिन, स्लोथ बियर, स्पॉटेड डियर, सांभर, ब्लैकबक, चिंकारा और मगर क्रोकोडाइल भी पाए जाते हैं।
आंध्र प्रदेश के वन्यजीव अभयारण्य और दुर्लभ प्रजातियाँ
अब बात करते हैं वन्यजीव अभयारण्यों की। कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य भारत का तीसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव जंगल है। यह काकीनाडा से 18 किलोमीटर की दूरी पर गोदावरी डेल्टा में स्थित है। श्री लंकामल्लेश्वर वन्यजीव अभयारण्य दुनिया का एकमात्र स्थान है जहाँ अत्यंत लुप्तप्राय जेर्डन कोर्सर पक्षी पाया जाता है।
इसके अलावा कौंडिन्या, रोलापाडु, गुंडला ब्रह्मेश्वरम, कृष्णा, कंबलकोंडा, पुलिकट झील और नेल्लापट्टु पक्षी अभयारण्य जैसे संरक्षित क्षेत्र आंध्र प्रदेश की अद्भुत जैव विविधता को दर्शाते हैं। आंध्र प्रदेश के जंगल पूर्वी घाट से लेकर समुद्री तट तक फैले हुए हैं, जहाँ मैंग्रोव, ड्राई डेसिड्यूअस, मोइस्ट डेसिड्यूअस और ड्राई एवरग्रीन फॉरेस्ट पाए जाते हैं।