हनुमान जयंती का महत्व - भगवान हनुमान के जन्मोत्सव का उत्सव

हनुमान जी का जन्मोत्सव – हनुमान जयंती का महत्व

भगवान शिव के 11वें अवतार, हनुमान जी का जन्म

भगवान शिव के 11वें अवतार, हनुमान जी का जन्मोत्सव पूरे देश में अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन चैत्र मास की पूर्णिमा को विशेष रूप से हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। प्रभु श्रीराम के परम भक्त, हनुमान जी को बल, बुद्धि, विद्या, शौर्य, और निर्भीकता के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। भक्त उन्हें कई नामों से पुकारते हैं – जैसे कि चिरंजीवी, बजरंगबली, संकटमोचन, महावीर, आदि।

हनुमान जी का जन्म कब हुआ था?

विज्ञान और ज्योतिषियों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म लगभग 58,812 वर्ष पहले हुआ था, जब चैत्र माह की पूर्णिमा को, मंगलवार के दिन, चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न के शुभ संयोग में प्रात: 6 बजे हुआ था। मान्यता के अनुसार, जब राजा दशरथ ने अग्निदेव से प्राप्त खीर को अपनी तीनों रानियों में बांट दिया था, तब एक चील ने झपट्टा मारकर खीर का एक टुकड़ा खा लिया। यह खीर देवी अंजना के आश्रम पर गिरी, जिससे उनके गर्भ में हनुमान जी का जन्म हुआ।

हनुमान जयंती के दिन की पूजा विधि

हनुमान जयंती के दिन, श्रद्धालु बजरंगबली को लाल वस्त्र, सिंदूर, ध्वजा, चंदन, कनेर के फूल, और शुद्ध घी का दीपक अर्पित करते हैं। नारियल, पेड़ों के फल, और पीले फूलों का भोग भी चढ़ाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से भजन-कीर्तन, जागरण और सुंदरकांड तथा हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। हनुमान जी की महिमा का गुणगान करने के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है।

हनुमान जयंती के दिन भारत के प्रमुख आयोजन

भारत के विभिन्न हिस्सों में इस दिन बड़े मेलों का आयोजन भी होता है। सभी भक्तों को हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। यदि आप ऐसे और प्रेरणादायक वीडियो देखना चाहते हैं, तो हमारे चैनल भारत माता को सब्सक्राइब करना न भूलें। हनुमान जयंती के अलावा, हमारे पास विभिन्न व्रत और त्यौहारों के बारे में जानकारी उपलब्ध है। आप हमारे व्रत एवं त्यौहार पृष्ठ पर भी जा सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आपको धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर और भी जानकारी मिलेगी।