अमरनाथ यात्रा: सम्पूर्ण जानकारी | इतिहास | रजिस्ट्रेशन | हेलीकॉप्टर बुकिंग | मान्यताएं और महत्व

भारत के मस्तक जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से लगभग 135 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित अमरनाथ गुफा वास्तव में देश के मुकुट मणि के रूप में सुशोभित है| महादेव को समर्पित अमरनाथ मंदिर भारत का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल एवं असंख्य श्रद्धालुओं व भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है| हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक अमरनाथ धाम में हिम अर्थात बर्फ़ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्माण होना इस मंदिर की प्रमुख विशेषता है और प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं।

अमरनाथ गुफा की पौराणिक कथा

ऐसी मान्यता है कि इस अद्भुत धाम के दर्शन मात्र से भक्तों का कल्याण हो जाता है| अमरनाथ यात्रा के विषय में कई पौराणिक कथाएं (Mythology of Amarnath Cave) भी हैं। इसी कारण बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए भक्त "बाबा बर्फ़ानी की जय" के नारों के साथ इस दुर्गम यात्रा पर जाते हैं| मान्यता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को इसी अमरनाथ गुफ़ा में अमरत्व के रहस्य से जुड़ी अमर कथा सुनाई थी और जिस समय भगवान शिव माता पार्वती को यह कथा सुना रहे थे उस समय उनके अतिरिक्त एक श्वेत कबूतर का जोड़ा भी वहीँ उपस्थित था.. जो यह कथा सुनकर अमर हो गया एवं आज भी अमरनाथ के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं को यह कबूतर को जोड़ा दिखाई देता है। यह भी कहा जाता है कि भोलेनाथ ने अमर कथा को सुनाते समय अमरनाथ यात्रा एवं उसके मार्ग में आने वाले पवित्र स्थलों का वर्णन किया था| 

अमरनाथ इतिहास: अमरनाथ गुफा की खोज किसने की?

कहते हैं की एक बार कश्मीर की घाटी जलमग्न हो गई तब जगत के प्राणियों की रक्षा के उद्देश्य से ऋषि कश्यप ने इस जल को अनेक नदियों और छोटे-छोटे जलस्रोतों में परिवर्तित कर दिया| उसी समय भृगु ऋषि (Amarnath History: Who discovered the Amarnath Cave?) पवित्र हिमालय पर्वत की यात्रा कर रहे थे | उस समय जल स्तर कम होने के कारण हिमालय की पर्वत श्रृखंलाओं में सर्वप्रथम भृगु ऋषि को अमरनाथ की पवित्र गुफ़ा और हिम शिवलिंग के दर्शन प्राप्त हुए| कहा ये भी जाता है कि भगवान शिव इस गुफा में श्रावण की पूर्णिमा को आए थे.. इसलिए उस दिन अमरनाथ की यात्रा का विशेष महत्व है। साथ ही यात्रा के लिए सुविधाजनक माह श्रावण का ही है.. अतः अधिकतर श्रद्धालु जुलाई और अगस्त के माह में अमरनाथ धाम के दर्शनों के लिए पहुँचते हैं। इस वर्ष 1 जुलाई से शुरू होने जा रही है अमरनाथ यात्रा। कहते हैं ये यात्रा काफ़ी कठिन होती है, परंतु महादेव भक्त सारी चुनौतियों को पूरा करने के बाद बाबा बर्फानी के दर्शन अवश्य करते हैं। इस यात्रा मे भक्तों को अद्भुत एवं अद्वितीय आनंद की अनुभूति होती है। 

कैसे होगी अमरनाथ यात्रा (Amarnath Location)

अमरनाथ यात्रा हिंदू धर्म में एक प्रमुख तीर्थ स्थल मानी जाती है, जिसे हर हिंदू अपने जीवनकाल में एक बार अवश्य अनुभव करना चाहता है। यह धार्मिक यात्रा प्रति वर्ष जम्मू और कश्मीर की सरकार द्वारा हिमालय में आयोजित की जाती है। इस यात्रा में सहस्त्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय भक्त सम्मिलित होते हैं। यह तथ्य अत्यंत रोचक है की मुख्य मंदिर समुद्र तल से 12,756 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। भक्त अपनी अमरनाथ यात्रा को दो रास्तों से पूरा कर सकते हैं – बलताल से अमरनाथ और पहलगाम से अमरनाथ। यात्रा को आसान बनाने के लिए श्रीनगर हवाई अड्डे / रेलवे स्टेशन / बस स्टैंड अत्यंत सहायक हैं। 

  1. श्रीनगर से पहलगाम – श्रीनगर से पहलगाम के मध्य shared cabs की सुविधा है| इन दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग 88 किमी है और राष्ट्रीय राजमार्ग 1 ए और के.पी. रोड के माध्यम से आपको लगभग 2 घंटे 18 मिनट लग जाएंगे।
  2. श्रीनगर से बलताल – श्रीनगर से बलताल के लिए सीधी टैक्सी मिलती है। यह आपको राष्ट्रीय राजमार्ग 1 के माध्यम से लगभग 3 घंटे 14 मिनट (95.2 किमी) में पहुंचा देती है|

बलताल से अमरनाथ गुफा तक ट्रेकिंग मार्ग: बलताल – डोमेल – बरारी मार्ग – संगम – अमरनाथ

पहलगाम से अमरनाथ गुफा तक ट्रेकिंग मार्ग: पहलगाम – चंदनवारी – पिस्सु टॉप – शेषनाग- पंचतरणी – अमरनाथ गुफा

अमरनाथ यात्रा की तैयारी के लिए विशेष सावधान की आवश्यकता होती है। यात्रा पर निकलने से पहले सम्पूर्ण दस्तावेज़ और मेडिकल फिटनेस होना ज़रूरी होता है|

कैसी करें अमरनाथ यात्रा Registration? 

अमरनाथ यात्रा (amarnath yatra registration) के लिए रजिस्टर करने के दो तरीके हैं – offline व online| बैंकों और रजिस्ट्रेशन केंद्रों से ‘यात्रा पर्ची’ प्राप्त कर सकते हैं। वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड करें और डॉक्टर या मेडिकल संस्थान द्वारा विशेष तिथि के बाद या उसके बाद जारी किए गए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के साथ ज़रूरी दस्तावेज जोड़ें| इसके साथ आप श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (amarnath shrine board) एसएएसबी से भी परमिट लें सकते हैं।

  1. एसएएसबी (अमरनाथ श्राइन बोर्ड) द्वारा अधिकृत डॉक्टर से अपना मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र लें, जो यह बताता है कि आप शारीरिक रूप से अमरनाथ यात्रा करने के लिए फिट हैं।
  2. यात्रा के दौरान आपको जिन आवश्यक दस्तावेज़ों की ज़रूरत होगी | अपनी पहचान हेतु वोटर आई.डी., ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, आदि लेकर जाए|

यात्रा आरंभ करने से पूर्व 2 से 3 सप्ताह तक प्रतिदिन लगभग 6 किलोमीटर पैदल चलें। व्यायाम की सहायता लें। यदि आप फेफड़ों के रोगों, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग से पीड़ित हैं, तो अमरनाथ यात्रा पर जाने से पहले डॉक्टर का परामर्श जरूर लें। 

अमरनाथ यात्रा के लिए Helicopter कैसे बुक करें?

भक्त अमरनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर की सीट पहले से ही बुक कर सकते हैं। हेलीकॉप्टर टिकटों को नामित बैंक शाखाओं से बुक किया जा सकता है। 

अमरनाथ यात्रा (amarnath yatra) के लिए जरूरी चीजें

  1. Plastic या rubber से बने बारिश से बचने वाले जूते अवश्य लाएं।

  2. गर्म कपड़े और ऊनी टोपी और मोज़े जरूर ले जाएँ। 

  3. आपातकालीन स्थितियों के लिए first aid kit  अवश्य रखें। 

  4. अधिक battery के साथ torch ले जाएँ। 

  5. बलताल, पंचतरणी और गुफा इलाकों में मोबाइल फोन काम नहीं करते हैं। केवल बीएसएनएल नेटवर्क ही काम करता है। इसलिए अपने साथ अपने घर से बीएसएनएल के सिम कार्ड ले जाना याद रखें।

अमरनाथ यात्रा पर खाने की सुविधा 

पूरी यात्रा के दौरान लंगर/निशुल्क भोजन की सुविधा होती है। आप परांठे, दूध, बिस्कुट, रोटियां, दाल, चावल, मिठाई, डोसा, चाय, ब्रेड का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा, दवा, और कुछ मुफ्त रहने की जगह और स्वच्छता सुविधाएं भी दी जाती हैं।

हम आशा करते हैं की ये जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हो| इन सभी बातों का ध्यान रखें और अपनी अमरनाथ यात्रा को सफल बनाएं।