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प्रसन्नता ईश्वर से निकटता लाती है | Swami Satyamitranand JI Maharaj | Geeta Gyaan | Pravachan

यह प्रवचन हमें जीवन को देखने की अत्यंत सूक्ष्म और आध्यात्मिक दृष्टि प्रदान करता है—जहाँ हर घटना, हर हानि और हर कठिनाई के पीछे परमात्मा की मंगलमय योजना छिपी होती है। अधिकांश लोग जीवन की घटनाओं को “अच्छा” और “बुरा” कहकर बाँटते हैं, लेकिन यह सत्संग सिखाता है कि ईश्वर के विधान में वास्तव में कुछ भी अमंगल नहीं होता

फकीर की मार्मिक कथा और जीवन का संदेश

एक फकीर और उसके जीवन से जुड़ी कथा के माध्यम से यह समझाया गया है कि जब बैल चले जाते हैं, तोता उड़ जाता है, और कुत्ता मर जाता है, तब भी यदि मन कह सके—भगवान का विधान मंगलमय है—तो वही सच्ची साधना है।

  • बाहरी घटनाएँ हमें हानि प्रतीत होती हैं, लेकिन वे कई बार हमारे प्राणों की रक्षा का कारण बनती हैं।

  • जीवन को ईश्वर की दृष्टि से देखने वाला व्यक्ति रोता नहीं, आह नहीं भरता—वह केवल “वाह” कहता है।

परिश्रम, प्रयास और ईश्वर की इच्छा

इस प्रवचन में यह स्पष्ट किया गया है:

  • परिश्रम करना मनुष्य का कर्तव्य है।

  • परिस्थितियों को सुधारने का प्रयास करना आवश्यक है।

  • यदि प्रयास के बाद भी सफलता न मिले, तो उसे ईश्वर की इच्छा मानकर आनंदपूर्वक स्वीकार करना ही सच्ची भक्ति है।

शुद्ध आचरण और कृतार्थ जीवन

श्रीमद्भागवत और गीता के गूढ़ भावों के माध्यम से “कृतार्थ जीवन” का अर्थ समझाया गया है—ऐसा जीवन जिसमें पछतावा नहीं, केवल आत्मसंतोष होता है।

  • शुद्ध आचरण से जीना

  • किसी का अधिकार न छीनना

  • द्वेष और ईर्ष्या से दूर रहना

  • प्रेम का विस्तार करना

यह सब सच्चे आध्यात्मिक जीवन के लक्षण हैं।

प्रसन्नता – ईश्वर के प्रति मौन प्रार्थना

यह प्रवचन स्मरण कराता है कि परमात्मा सदा प्रसन्न हैं, और जब मनुष्य अप्रसन्न रहता है, तो वह अपने सृजनकर्ता के प्रति कृतज्ञता भूल जाता है।

  • प्रसन्न रहना केवल मानसिक स्थिति नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति मौन प्रार्थना है।

जीवन में बार-बार आने वाले प्रश्न और समाधान

यह वीडियो उन सभी साधकों के लिए है जो जीवन में बार-बार सोचते हैं—
“मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?”
यदि आप जीवन को ईश्वर की लीला के रूप में देखना सीखना चाहते हैं, दुख में भी आनंद और असफलता में भी श्रद्धा का अनुभव करना चाहते हैं—तो इस प्रवचन को अंत तक सुनना आवश्यक है।