ऐसी थी भगवान शिव की बारात! | शिव–पार्वती विवाह कथा || Swami Satyamitranand Giri ji Maharaj Pravachan
भारत माता की इस प्रस्तुति में Swami Satyamitranand Giri जी महाराज बताते हैं कि केदारनाथ में आज भी वह वेदी प्रज्वलित है, जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। पंडों ने उस अग्नि को युगों से जाग्रत रखा है।
जब विवाह का शुभ मुहूर्त निकला, तब ब्रह्मा जी ने स्वयं लग्न पत्रिका लिखी। सप्तर्षियों ने जाकर वह पत्रिका राजा हिमाचल (पार्वती जी के पिता) को सौंपी। विवाह का समाचार पाकर राजा हिमाचल का हृदय प्रेम से भर गया।
नियम के अनुसार, सबसे पहले निमंत्रण ब्रह्मा जी को दिया गया। ब्रह्मा जी अत्यंत प्रसन्न हुए क्योंकि शिव जी को विवाह के लिए मनाते-मनाते देवता थक चुके थे। ब्रह्मा जी ने तुरंत समस्त देवताओं और मुनियों का आह्वान किया और कहा,
“चूँकि समय कम है और सबके पास अलग-अलग पत्रिका भेजना संभव नहीं, इसलिए आप सब यहीं एकत्र हों। महादेव का विवाह होने वाला है!”
यह सुनते ही आकाश से फूलों की वर्षा होने लगी और बिना बजाए ही दिव्य बाजे बजने लगे। इंद्र और अन्य देवताओं ने हर्षित होकर शिव जी की जय-जयकार की।
देवताओं की तैयारी और शिव जी का अद्भुत श्रृंगार
सभी देवता अपने-अपने दिव्य वाहनों को सजाकर तैयार हो गए। स्वामी जी विनोद में कहते हैं कि उस समय जिसके पास जो श्रेष्ठ साधन था—चाहे वह रथ हो या हाथी—सब निकल पड़े।
इधर, शिव जी के गणों ने अपने स्वामी का श्रृंगार करना शुरू किया। जटाओं का मुकुट बनाया गया और उस पर मोरपंख सजाया गया। कुंडल और कंगन के स्थान पर जीवित सर्पों को आभूषण बना दिया गया। शिव जी ने हाथी की खाल (गजचर्म) धारण की, माथे पर तीसरा नेत्र और गंगा जी सुशोभित थीं। हाथ में त्रिशूल और डमरू लेकर वे नंदी पर सवार हुए।
जब विष्णु और ब्रह्मा जी सहित सभी देवता अपनी सजी-धजी सेना के साथ चले, तो उन्हें एक संकोच हुआ। देवताओं का स्वरूप अत्यंत सुंदर था, जबकि दूल्हा (शिव जी) का वेश विचित्र था। देवताओं ने आपस में कहा,
“यदि हम इनके साथ चलेंगे, तो लोग हम पर हँसेंगे। इसलिए हमें अपनी टोलियाँ अलग रखनी चाहिए।”
महादेव सब समझ रहे थे; वे मन ही मन मुस्कुराए कि जिन्हें मैंने बुलाया भी नहीं, वे ही अब संकोच कर रहे हैं।
शिव गणों का आगमन और बारात का कौतुक
तब शिव जी ने अपना डमरू बजाया और उनके वास्तविक गण प्रकट हो गए। यह बारात विलक्षण थी:
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अजीब स्वरूप: किसी के मुख नहीं थे, तो किसी के कई मुख थे।
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विचित्र काया: कोई बिना पैर के चल रहा था, तो किसी के पास बीसियों पैर और आँखें थीं।
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अघोरी रूप: कोई बहुत मोटा, कोई अत्यंत दुबला। उनके साथ भूत, प्रेत, पिशाच और योगी भी थे।
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पशु-पक्षी: समाज के हर वर्ग को साथ लेने के प्रतीक स्वरूप गधे, कुत्ते और सूअर जैसे जीवों को भी उस उत्सव का हिस्सा बनाया गया।
यह पूरी जमात नाचती-गाती और विचित्र ध्वनियाँ निकालती हुई हिमाचल नगर की ओर बढ़ी। जैसा दूल्हा, वैसी ही बारात!
हिमाचल नगर का ऐश्वर्य और नगरवासियों का भय
राजा हिमाचल ने अपनी नगरी को ऐसा सजाया था कि उसके सामने इंद्रलोक भी फीका लगे। बिजली की सजावट, तोरण, आम और केले के खंभों से पूरा शहर चमक रहा था।
जब बारात नगर के निकट पहुँची, तो भारी शोर मच गया। नगर के बच्चे बारात देखने दौड़े, लेकिन शिव जी के डरावने गणों और भूतों को देखकर वे डर के मारे घर में दुबक गए।
जब माता मैना (पार्वती जी की माता) ने आरती उतारने के लिए घूँघट की ओट से शिव जी का विकट रूप देखा, तो वे भयभीत हो गईं। अन्य स्त्रियाँ तो डर से मूर्छित होने लगीं।
मैना जी विलाप करने लगीं,
“मैंने अपनी सुकुमारी बेटी के लिए कैसा वर चुन लिया? यह तो कल्पवृक्ष पर बबूल के फल जैसा हो गया। मैं यह विवाह नहीं होने दूँगी!”
नारद जी का उपदेश और विवाह संपन्न
तब माता पार्वती ने अपनी माँ को समझाया,
“हे माता! जो भाग्य में लिखा है, उसे कोई नहीं मिटा सकता। इसमें किसी का दोष नहीं है।”
उसी समय नारद जी और सप्तर्षि वहाँ पहुँचे। नारद जी ने माता मैना को पार्वती जी के पूर्व जन्म (सती की कथा) का स्मरण कराया और बताया कि शिव जी का यह रूप केवल बाहरी है; वे साक्षात परब्रह्म हैं।
सत्य जानकर सबका संशय दूर हुआ। नगर में मंगल गान होने लगा। उस समय की परंपरा के अनुसार, भोजन के समय स्त्रियाँ मधुर स्वर में ‘गालियाँ’ (परिहास गीत) देने लगीं। देवताओं ने, जिन्होंने अब तक केवल वेद मंत्र सुने थे, इन प्रेम भरी गालियों का भी खूब आनंद लिया।
अंत में, ब्रह्मा जी ने दिव्य सिंहासन तैयार किया। मुनियों के अनुशासन से गणेश पूजन संपन्न हुआ। जब शिव जी ने पार्वती जी का पाणिग्रहण किया, तब जाकर देवताओं की जान में जान आई कि अब विवाह निर्विघ्न संपन्न हो जाएगा।
चारों ओर ‘जय शंकर’ के जयघोष होने लगे और ब्राह्मणों ने सस्वर वेद पाठ किया।
उपसंहार
इस प्रकार, यह विवाह जगत के कल्याण के लिए संपन्न हुआ, जहाँ मर्यादा और आनंद का अद्भुत मिलन देखने को मिला।