सुभाष चंद्र बोस | रक्त ही आज़ादी की कीमत चुका सकता है

1947.. तारीख़ के पन्नों पर वो ख़ुशी का पल लेकर आया.. जिसका इंतज़ार हर हिन्दुस्तानी को था! आज़ाद हिंदुस्तान का सपना अब हक़ीक़त में तब्दील हो चुका था.. लेकिन इस आज़ादी को हासिल करने में न जाने कितने वतनपरस्तों ने अपना सब कुछ वतन पर कुर्बान कर दिया। ऐसी ही एक वतनपरस्त और बेख़ौफ़ आज़ादी की मशाल का नाम था – सुभाष चन्द्र बोस जिन्होंने राष्ट्र को ये स्पष्ट प्रेरक सन्देश प्रदान किया - हर सुबह तभी निकलती है जब वह रात्रि का सामना करती है बहादुर बनकर संघर्ष जारी रखो स्वतंत्रता बेहद निकट है। स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष के इतिहास में.. सुभाष चन्द्र बोस सभी विशिष्टताओं में और स्वयं ही एक क्रांति के रूप में सुशोभित हैं। एक ऐसी क्रांति जो भारत तक ही सीमित नहीं रही.. अपितु विश्व को भी स्वतंत्रता संग्राम में समिल्लित कर लिया। जीवन सिद्धांत में.. विचारधारा में.. दृढ विश्वास में.. अनुपम साहस में.. समकालीन इतिहास में.. सुभाष चंद्र बोस अपने संपूर्ण व्यक्तित्व में बीसवीं सदी के भारत की एक अद्वितीय गाथा हैं।