गुरुजी की कवितायें

एक पंछी उड़ रहा था| Ek Panchi Ud Raha Tha | Kavita |Swami Satyamitranand Giri Ji Maharaj |Bharat Mata

एक पंछी उड़ रहा था| Ek Panchi Ud Raha Tha | Kavita |Swami Satyamitranand Giri Ji Maharaj |Bharat Mata

दीप तुम जलते रहो | स्वामी सत्यमित्रानंद गिरिजी महाराज | Deep Tum Jalte Raho | Bharat Mata

दीप तुम जलते रहो | स्वामी सत्यमित्रानंद गिरिजी महाराज | Deep Tum Jalte Raho | Bharat Mata

जो कर लिया सो कर चुके हो | Jo Kar Liya So Kar Chuke Ho | सकारात्मक भविष्य की खोज | Kavita

संसार में अकर्मण्यता तथा आलस्य की युक्ति के समान वाक्य है कि “समय कम है” किन्तु विचार की श्रेष्ठा एवं कर्मठ तथा ज्ञानी मानव का सन्देश है कि “अब भी समय है”।

दीप तुम्हे शत शत प्रणाम | Deep Tumhe Shat Shat Pranaam | Swami Satyamitranand Giri Ji Maharaj

हे दीप तुम्हें शत-शत प्रणाम, तुम पूजा के साक्षी ललाम ॥ तुम ऊर्ध्वमुखी सूर्यांश मुखर देते प्रकाश प्रति नगर-नगर । स्नेहासिक्त मृत्तिका धार, युद्धोन्मुख हो तुमसे अन्धकार |

धरती माता | Dharti Mata | Bharat Mata

धरती पर बैठे हैं, धरती पर सोना हैं कुटिया , प्रसाद - भवन धरती का कोना हैं धरती ने जन्म दिया, धरती दुलारती हैं धरती से खींच गंध , पुष्प राशि लती हैं ।

प्रीती प्रेम से सहना होगा | Preeti Prem Se Sahena Hoga | Bharat Mata

प्रीती प्रेम से सहना होगा | Preeti Prem Se Sahena Hoga | Bharat Mata

बांटा नया सवेरा | Banta Naya Sawera | Bharat Mata

बांटा नया सवेरा - स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज

मैंने बुलाया तो बहुत तुमसे आया न गया | Swami Satyamitranand Giri Ji Maharaj | चिर प्रतीक्षा

Maine Bulaya To Bahut Tmse Aaya Na Gaya | Swami Satyamitranand Giri Ji Maharaj | चिर प्रतीक्षा

याद तेरी बहुत आती है | Yaad Teri Bahut Aati Hai (Swami Ji Ke Swar) | Bharat Mata

शपथ लेते हैं, साथ ना चलते हैं लाज छोड़कर भी मन मचलते हैं पैर धरती पर स्वयं आकाश मे उड़ते हैं बात-चीत मे जुबान की चाकू चल जाती है

वक्त आता है चला जाता है | Swami Satyamitranand Giri Ji Maharaj | Waqt Aata Hai Chala Jata Hai

ज़िन्दगी में कुछ पल ऐसे आते हैं जो ज़िन्दगी को खुशियों से भर देते हैं.. तो कुछ पल ग़म के बादल भी साथ लेकर आते हैं। किसी नदी की तरह बहता हुआ वक़्त.. ज़िन्दगी में बहुत कुछ सिखाता रहता है।

सैनिक तुझे सलाम | Sainik Tujhe Salam | स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महराज | Republic Day | Kavita

युद्धभूमि मसि-पात्र है.. सैनिक कलम समान । बलिदानों के पृष्ठ पर गाथा लिखी महान ।। सीमा पर प्रहरी बने.. नहीं सुविधा की चाह । पट-कुटीर में वास कर.. चले समर की राह ।।

व्याधि तो वरदान है | Vyadhi to Vardan hai | Swami Satyamitranand Giri Ji Maharaj | Bharat Mata

व्यथित पीड़ित हो न कोई व्याधि तो वरदान है । और साजों से सजा प्रारब्ध का ही गान है । कर्म की जंजीर का यह एक छोटा भाग है । पूर्व के संगीत का ही यह अधूरा राग है ।