भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की आध्यात्म एक विज्ञान है और परमात्मा सर्वत्र है।
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की आध्यात्म एक विज्ञान है और परमात्मा सर्वत्र है।
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की कर्म योग करते हुए ईश्वर का ध्यान करें.
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की आप परमात्मा को नहीं मानते लेकिन परमात्मा आप को मानता है.
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की श्रीमद भगवत गीता जीवन का शास्त्र है। जीवन में संतुलन का सबसे उत्तम और प्रभावी मार्ग श्रीमद भगवत गीता है।
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की भोजन के लिए जीवन या जीवन के लिए भोजन?
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की पुत्र कुपुत्र हो सकता है पर माता कुमाता नहीं, यही कारण है की गंगा मैया ने सभी को समान रूप से अपनाया है।
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है, कुम्भ के आध्यात्मिक महत्व, माता गंगा की महिमा और नारायण का अर्थ क्या है। | स्वामी जी के अनुसार कुम्भ मात्र एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा अद्भुत अनुभव है
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की जीवन मे दर्शन और श्रवण से कितने परिवर्तन आते हैं। इस प्रस्तुति मे स्वामी जी ने कहा है की कुम्भ मे आत्म को परमात्मा से जुडने का अवसर मिलता है।
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की अधर्म कभी सुख प्रदान नहीं करता। मनुष्य को सदा अपने धर्म का पालन करना चाहिए।
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की इस संसार में सभी भौतिक सुख-सुविधाओं को भूल जाना चाहिए, लेकिन अपनी माटी का सम्मान को कभी नहीं भूलना चाहिए।
भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की जीवन में हम क्या लेकर आते हैं और अंत में क्या लेकर जाते हैं। स्वामी जी के शब्दों में कुम्भ का मेला "प्रयागराज क्रांति का पर्व" है।