प्रवचन

उपासना का अर्थ क्या है? | क्या उपासना आपके जीवन को बदल सकती है? | स्वामी सत्यमित्रानंद जी महाराज

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की आध्यात्म एक विज्ञान है और परमात्मा सर्वत्र है।

अध्यात्म एक विज्ञान है, परमात्मा सर्वत्र है | Swami Satyamitranand ji | Bhagwad Geeta | Pravachan

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की आध्यात्म एक विज्ञान है और परमात्मा सर्वत्र है।

कर्म योग करते हुए ईश्वर का ध्यान करें | स्वामी सत्यमित्रानंद जी महाराज प्रवचन | Bhagavad Geeta Katha

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की कर्म योग करते हुए ईश्वर का ध्यान करें.

आप परमात्मा को नहीं मानते लेकिन परमात्मा आप को मानता है | Swami Satyamitranand Giri ji Maharaj

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की आप परमात्मा को नहीं मानते लेकिन परमात्मा आप को मानता है.

श्रीमद भगवत गीता: जीवन का शास्त्र | Swami Satyamitranand ji Maharaj | Shrimad Bhagavad Geeta Katha

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की श्रीमद भगवत गीता जीवन का शास्त्र है। जीवन में संतुलन का सबसे उत्तम और प्रभावी मार्ग श्रीमद भगवत गीता है।

गीता के माध्यम से जानिए भोजन के लिए जीवन या जीवन के लिए भोजन? | स्वामी सत्यमित्रानंद जी | Pravachan

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने गीता के माध्यम वर्णित किया है की भोजन के लिए जीवन या जीवन के लिए भोजन?

पुत्र कुपुत्र हो सकता है पर माता कुमाता नहीं | Swami Satyamitranand Ji Maharaj | कुंभ प्रवचन

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की पुत्र कुपुत्र हो सकता है पर माता कुमाता नहीं, यही कारण है की गंगा मैया ने सभी को समान रूप से अपनाया है।

नारायण का क्या अर्थ है? | Swami Satyamitranand Ji Maharaj | Pravachan | महाकुंभ प्रयागराज

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है, कुम्भ के आध्यात्मिक महत्व, माता गंगा की महिमा और नारायण का अर्थ क्या है। | स्वामी जी के अनुसार कुम्भ मात्र एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा अद्भुत अनुभव है

चित्र चरित्र का निर्माण कैसे करता है | Swami Satyamitrananad Ji Maharaj | Kumbh Pravachan - 6

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की जीवन मे दर्शन और श्रवण से कितने परिवर्तन आते हैं। इस प्रस्तुति मे स्वामी जी ने कहा है की कुम्भ मे आत्म को परमात्मा से जुडने का अवसर मिलता है।

सबसे बड़ी माता - भारतमाता | Kumbh Ki Smritiyan | Swami Satyamitranand ji Pravachan - 5

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की अधर्म कभी सुख प्रदान नहीं करता। मनुष्य को सदा अपने धर्म का पालन करना चाहिए।

भारतीय संस्कृति पारदर्शिता का संदेश देती है | Swami Satyamitranand Ji Maharaj | Kumbh Pravachan - 4

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की इस संसार में सभी भौतिक सुख-सुविधाओं को भूल जाना चाहिए, लेकिन अपनी माटी का सम्मान को कभी नहीं भूलना चाहिए।

क्या लेकर आया जग में, क्या लेकर जाएगा | स्वामी जी प्रवचन Part 3

भारत माता की इस प्रस्तुति मे परम पूजनीय स्वामी सत्यामित्रानंद गिरि जी महाराज ने कुम्भ की स्मृतियों के माध्यम वर्णित किया है की जीवन में हम क्या लेकर आते हैं और अंत में क्या लेकर जाते हैं। स्वामी जी के शब्दों में कुम्भ का मेला "प्रयागराज क्रांति का पर्व" है।